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2 सीट पर 13 दावेदार! झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर जबर्दस्त सेटिंग, नंबर गेम जानें

Updated on 29-05-2026
रांची: झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शह-मात का खेल शुरू हो गया है। राज्य की दो राज्यसभा सीटों के लिए राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी गोटियां बिछाना शुरू कर दिया है। एक तरफ जहां पूर्ण बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े (28 वोट) नहीं होने के बावजूद भाजपा ने अपना उम्मीदवार खड़ा करने का रणनीतिक फैसला लेकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी इस सीट पर अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है। राज्यसभा टिकट को लेकर कांग्रेस नेताओं की दिल्ली में आलाकमान के पास दौड़ बढ़ गई है, जिससे राज्य की सियासत पूरी तरह गरमा गई है।


बहुमत की कमी के बावजूद भाजपा की रणनीतिक तैयारी

झारखंड से राज्यसभा सीट पर पहली वरीयता की जीत दर्ज करने के लिए किसी भी दल को कम से कम 28 विधायकों के वोटों की आवश्यकता है। वर्तमान में भाजपा और उसके सहयोगियों (NDA) को मिलाकर कुल 24 विधायक ही हैं, जो जरूरी आंकड़े से 4 कम हैं। इसके बावजूद भाजपा ने पीछे हटने के बजाय चुनावी मैदान में उतरने का साहसिक रणनीतिक फैसला लिया है। प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में संभावित नामों पर विस्तृत चर्चा के बाद अंतिम चयन के लिए तीन नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेजने का निर्णय लिया गया है।

भाजपा का संगठन के मुख्य चेहरों पर भरोसा

पिछले 10 वर्षों में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने झारखंड में हमेशा संगठन के बैकग्राउंड से आने वाले पदाधिकारियों पर विशेष भरोसा जताया है। इस रणनीति की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी, जब तत्कालीन प्रदेश कोषाध्यक्ष महेश पोद्दार चुनाव जीतकर राज्यसभा पहुंचे थे। इसके बाद संगठन से आने वाले समीर उरांव, दीपक प्रकाश, आदित्य साहू और हाल ही में प्रदीप वर्मा को राज्यसभा भेजा गया। झारखंड गठन के बाद से अब तक भाजपा के कुल 14 सांसद राज्यसभा पहुंचे हैं, जिनमें केवल एसएस अहलुवालिया ही एकमात्र ऐसे नेता रहे जिन्हें दो बार राज्यसभा जाने का गौरव प्राप्त हुआ।

दावेदारी के साथ दिल्ली में जमी कांग्रेस की लॉबिंग

इधर, सत्ताधारी गठबंधन के भीतर कांग्रेस ने भी राज्यसभा सीट पर अपना दावा मजबूत कर दिया है। टिकट की रेस में शामिल पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, पूर्व सांसद धीरज साहू और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर जैसे बड़े नेताओं ने दिल्ली में डेरा जमा लिया है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और महासचिव केसी वेणुगोपाल सहित आला नेताओं से मुलाकात कर नेता अपनी बात रख रहे हैं। गठबंधन में बातचीत आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश प्रभारी के. राजू और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क को अधिकृत किया है, जो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात करेंगे।

झामुमो का पलड़ा भारी, फिर नथवानी फैक्टर

गठबंधन के तहत झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के पास वर्तमान में 34 विधायक हैं, जिससे उसकी जीत तय मानी जा रही है। झामुमो की ओर से दिवंगत शिबू सोरेन की बेटी अंजलि सोरेन, मिथिलेश ठाकुर और कुणाल सारंगी जैसे नामों की चर्चा है। वहीं, कांग्रेस के पास 16 विधायक हैं, इसलिए वो गठबंधन के सहयोग से प्रत्याशी उतारना चाहती है। इस बीच, झारखंड से दो बार राज्यसभा सांसद रहे परिमल नथवानी ने भी झामुमो से संपर्क साधा है। फिलहाल, आंध्र प्रदेश से सांसद नथवानी ने झारखंड को अपनी पहली प्राथमिकता बताते हुए इंडिया गठबंधन की ओर से दावेदारी की इच्छा जताई है।

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