नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के तौर पर डिनोटिफाई किए जाने को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी की बातों को कांग्रेस ने भी जोर-शोर से उठाया है। लेकिन, पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी महासचिव स्मृति ईरानी ने इस मुद्दे को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से दो टूक सवाल पूछ लिया है कि आखिर जंतर-मंतर को प्रदर्शन-स्थल के रूप में नोटिफाई किसने किया था?बीजेपी महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सियासी अनबन जग-जाहिर है। अब ईरानी को बीजेपी ने बड़ी जिम्मेदारी दी है, तो उन्होंने एक बार फिर से कांग्रेस नेतृत्व को अपने उसी अंदाज में घेरना शुरू कर दिया है। अंग्रेजी न्यूज चैनल इंडिया टुडे के साथ एक इंटरव्यू में स्मृति ईरानी ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में डिनोटिफाई किए जाने के दिल्ली पुलिस के फैसले का न सिर्फ समर्थन किया है, बल्कि राहुल गांधी की मौजूदा राजनीति पर जोरदार हमला करते हुए उन्हें आईना भी दिखा दिया है।जंतर-मंतर को किसने नोटिफाई किया?
बीजेपी नेता ने राहुल गांधी को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कुछ महिला पुलिसकर्मियों समेत कई पुलिस अफसरों के साथ प्रदर्शनकारियों की ओर से की गई कथित मारपीट की निंदा करने की चुनौती दी है। बता दें कि दिल्ली पुलिस पर भी प्रदर्शनकारियों के साथ कथित बर्बरता के आरोप लगाए गए हैं, जिसमें महिलाएं भी शामिल हैं। जब उनसे पूछा गया कि जंतर-मंतर तो परंपरागत प्रदर्शन स्थल रहा है, तो उन्होंने कहा कि उसे किसने नोटिफाई किया था?उसे किसने नोटिफाई किया था? किसने नोटिफाई किया था? (एंकर- 1991 में सरकार ने जब वोट क्लब से जंतर-मंतर शिफ्ट किया गया। प्रदर्शन स्थल के रूप में।) सही है। अब आप एक जगह को प्रदर्शन स्थल के रूप में घोषित करते हैं, जो देश के पूरे सरकारी तंत्र के केंद्र में है...जो सिर्फ संसद के ही करीब नहीं है, यह भारत के सुप्रीम कोर्ट के भी नजदीक है..। और जब यहां पर जमा होते हैं....आपने आश्वासन दिया कि आप शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। लेकिन, उन लोगों ने आखिरकार किया क्या?
स्मृति ईरानी, बीजेपी महासचिव
'राहुल गांधी का एक भी बयान दिखा दीजिए'
बीजेपी नेता स्मृति ईरानी आरोप लगाया कि 280 पुलिस अफसरों के साथ प्रदर्शनकारियों ने ज्यादती की, लेकिन राहुल गांधी की जुबान नहीं खुली। उन्होंने सवाल उठाया कि उन्होंने ऐसा नहीं करने की एक भी अपील क्यों नहीं की?इन्होंने (प्रदर्शनकारियों ) दिल्ली पुलिस के 280 अफसरों को पीटा और उनपर हमला किया। क्या आप मुझे राहुल गांधी का एक बयान दिखा सकते हैं, जिसमें उन्होंने एकबार भी कहा हो कि किसी को भी पुलिस अफसर के साथ मारपीट नहीं करनी चाहिए? क्या आप मुझे एक बयान दिखा सकते हैं? ...क्या आप मुझे विपक्ष के नेता का एक बयान दिखा सकते हैं? जिन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा हो कि पुलिस अधिकारी को नहीं पीटा जाना चाहिए?
स्मृति ईरानी, बीजेपी महासचिव
राहुल गांधी ने जंतर-मंतर वापस लेने का किया दावा
बता दें कि जब 14 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के नाम पर शपथ पत्र में किए गए वादे का उल्लंघन करने के आरोप में सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली की एक अदालत ने पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा तो राहुल गांधी ने एक्स पोस्ट पर लिखा, 'जंतर-मंतर भारत के लोगों का है। हम इसे वापस लेंगे।'जंतर-मंतर पर कब से हो रहे थे धरना-प्रदर्शन
- तथ्यों की पड़ताल करें तो पहले राजधानी में इस तरह के विरोध-प्रदर्शन इंडिया गेट के पास बोट क्लब पर होते थे।
- लेकिन, 1988 में किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के व्यापक प्रदर्शन के दौरान बोट क्लब की सूरत और सेहत बिगड़ गई।
- फिर 1992 में बाबरी मस्जिद को गिराने के बाद पैदा हुए माहौल में 1993 में कांग्रेस की तत्कालीन केंद्र सरकार ने इस प्रदर्शन-स्थल को औपचारिक रूप से जंतर-मंतर पर शिफ्ट कर दिया और तब से लेकर वहीं पर प्रदर्शन हो रहे थे, जिसे अब डिनोटिफाई करके तीन अलग वेन्यू पर शिफ्ट किया गया है।