छात्रों के प्रदर्शन के बाद महंगाई को लेकर फ्रांस को फूंक रहे वामपंथी, गृहयुद्ध जैसे हालात, ऐतिहासिक लिमोज टाउन हॉल खाक

Updated on 18-10-2026
पेरिस: फ्रांस में गृहयुद्ध जैसे हालात हैं। देश के कई हिस्सों में खतरनाक स्तर पर अराजकता फैली हुई है और प्रदर्शनकारी देश को जला रहे हैं। शनिवार को फ्रांस में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं और बड़े पैमाने पर लूटपाट हुई और कई जगहों पर आगजनी की घटनाएं सामने आईं। बढ़ती महंगाई के खिलाफ देश भर में हो रहे विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं और सड़कों पर भयानक उत्पात मचाया जा रहा है। फ्रांस में छात्र आंदोलन के नाम पर शुरू हुई ये हिंसा अब धीरे धीरे गृहयुद्ध की तरफ बढ़ रही है।

  • प्रदर्शनकारियों ने 140 साल पुराने लिमोज टाउन हॉल को जलाकर खाक कर दिया है। लिमोज शहर में 140 साल से भी पुराना टाउन हॉल था जिसे नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने तोड़कर अंदर घुसने के बाद आग लगा दी। इसके अलावा मार्सिले और लिले में भी दो अन्य टाउन हॉल में तोड़फोड़ की गई।
  • फ्रांस में पिछले कई हफ्तों से अशांतिफैली हुई है और छात्रों के कई हफ्तों तक चले विरोध प्रदर्शनों के बाद अब महंगाई को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। इससे देश में राजनीतिक अनिश्चितता और गहरी हो गई है जबकि फ्रांस में छह महीने बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को बदलने के लिए चुनाव होने वाले हैं।
  • फ्रांसीसी सरकार ने वामपंथी पार्टी पर छात्रों को भड़काकर आंदोलन को हिंसक बनाने का आरोप लगाया है। जबकि अमेरिका के उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने 'तीसरी दुनिया' पर एक खूबसूरत देश फ्रांस को इस स्थिति में धकेलने का इल्जाम मढ़ा है।
  • अमेरिका के उप-राष्ट्रपति ने फ्रांस हिंसा पर क्या कहा?

    जेडी वेंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जलते लिमोज टाउन हॉल वाले एक पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा 'पश्चिमी उदारवादियों ने विविधता और दया के नाम पर तीसरी दुनिया के लोगों को फ्रांस और अन्य देशों में ला बसाया। उन्होंने उस देश को स्वीकार करने और मेल-जोल से जुड़े बुनियादी सवालों को नजरअंदाज कर दिया। उन्हें पहले ही चेतावनी दी गई थी कि ऐसा हो सकता है, लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी।'
  • उन्होंने आगे लिखा 'मैं प्रार्थना करता हूँ कि फ्रांस जो अद्भुत लोगों से भरा एक खूबसूरत देश है वो इस पागलपन को समय रहते रोक ले, जब तक कि उसके और भी महत्वपूर्ण स्थल जलकर राख न हो जाएं। और मुझे उम्मीद है कि अमेरिकी लोग इस पर ध्यान दे रहे होंगे। कांग्रेस में मौजूद डेमोक्रेट्स आपके देश के लिए यही भविष्य चाहते हैं।'
  • फ्रांस में प्रदर्शन और हिंसा क्यों भड़की है?

    • राजधानी पेरिस और अन्य शहरों में बढ़ती महंगाई के खिलाफ निकाले गए मार्च के दौरान हिंसा भड़क गई।
    • गृह मंत्रालय के अनुसार इन मार्च में 5,50,000 लोग शामिल हुए थे जबकि इसमें हिस्सा लेने वाले CGT यूनियन का दावा है कि इसमें 8,00,000 लोग शामिल थे।
    • पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोइरे ने बताया कि शहर की कई सड़कें पूरी तरह तबाह हो गई हैं। नकाबपोश युवाओं के समूहों ने खड़ी कारों में आग लगा दी और कई दुकानों में तोड़फोड़ की।
    • फ्रांसीसी प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू जिन्होंने पहले ही इस 'बेहद भीषण हिंसा' की कड़ी निंदा की थी उन्होंने शनिवार देर रात बताया कि 1,200 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 150 पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं।
    फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा 'हमारे गणतंत्र में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। जिन लोगों ने सरकारी कार्यालयों और व्यवसायों में तोड़फोड़ की, उन पर हमला किया और यहां तक कि टाउन हॉल में लूटपाट भी की उन पर मुकदमा चलाया जाएगा और उन्हें सजा दी जाएगी। प्रदर्शन करने के अधिकार की रक्षा करने वाली कानून प्रवर्तन एजेंसियों को मैं पूरे देश की ओर से अपना समर्थन देता हूं। हम सब मिलकर उन अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ खड़े होंगे जो हमारी संस्थाओं को नष्ट करना चाहते हैं और जो लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगे रखना चाहते हैं उन्हें ऐसा करने से रोकना चाहते हैं।'
  • फ्रांस में ऐसा लग रहा है जैसे जंगल राज हो

    • प्रदर्शनकारियों का गिरोह शहर की सड़कों पर घूम रहे हैं और उत्पात मचा रहे हैं। वो पुलिसवालों पर हमले कर रहे हैं और जगह-जगह आग लगा रहे हैं। बंद दुकानों के शटर तोड़कर उनके अंदर घुस रहे हैं और सामान लूट रहे हैं।
    • पेरिस, मार्सिले, नीस, नान्तेस, बोर्डो, लिमोज, लिले, टूलूज़ और स्ट्रासबर्ग में कई दुकानों को लूटा गया है। इनमें सुपरमार्केट, फार्मेसी, लग्जरी बुटीक, कपड़ों की दुकानें, चश्मे की दुकानें, कॉस्मेटिक की दुकानें और इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर शामिल थे।
    • पेरिस में AFP के पत्रकारों ने बताया है कि नकाबपोश दर्जन युवाओं के समूह एक सुनियोजित तरीके से दुकानों को निशाना बनाया। उन्होंने मास्क और दस्ताने पहन रखे थे। उन्होंने पहले सीसीटीवी कैमरों को बंद किया और फिर खिड़कियां तोड़कर अंदर घुस गये।
    फ्रांस की दक्षिणपंथी पार्टी की राष्ट्रपति उम्मीदवार मरीन ले पेन ने 'दंगाइयों' की निंदा की और दावा किया कि राष्ट्रपति पद के लिए उनके प्रतिद्वंद्वी वामपंथी नेता ज्यां-ल्यूक मेलनचॉन की पार्टी ने हिंसा को जायज ठहराया है।' उन्होंने 'X' पर कहा कि अगर वह सत्ता में आती हैं तो वह फ्रांसीसी लोगों को 'अति-वामपंथियों की हिंसा' से बचाएंगी। मेलनचॉन जिन्होंने इन प्रदर्शनों और उससे पहले हुए छात्र विरोध-प्रदर्शनों का खुलकर समर्थन किया था उन्होंने अब प्रदर्शनकारियों से लूटपाट से दूर रहने की अपील की और कहा कि यह हमारे तरीकों के खिलाफ है।

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