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'अमेरिका के साथ समझौता बहुत दूर', ईरान ने शांति की उम्मीदों पर फेरा पानी, फिर हमला करने की तैयारी में ट्रंप?

Updated on 23-05-2026
वॉशिंगटन: ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के साथ चल रही गुप्त शांति वार्ताओं की पोल खोलकर रख दी है। देश की सरकारी मीडिया के जरिए प्रसारित एक आधिकारिक बयान में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने स्पष्ट किया कि उच्च-स्तरीय मध्यस्थता जारी होने के बावजूद तेहरान और वाशिंगटन के बीच काम करने के तरीके और विचारधारा से जुड़ी दूरियां "गहरी और काफी ज्यादा" बनी हुई हैं। ईरानी प्रवक्ता ने अमेरिका के साथ बातचीत में जल्द कोई बड़ी सफलता मिले की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। यानि डोनाल्ड ट्रंप जैसा दावा कर रहे हैं कि ईरान घुटने टेक चुका है और तेहरान ने उसे 'गलत' बताया है।

बगाई ने जल्द ही किसी बड़ी सफलता मिलने की खबरों को सीधे तौर पर खारिज करते हुए कहा कि बातचीत अभी किसी अंतिम समाधान के "करीब" भी नहीं पहुंची है। उन्होंने आगे कहा कि यह अनुमान लगाना बेहद मुश्किल है कि क्या कोई युद्धविराम "कुछ हफ्तों या महीनों के भीतर" औपचारिक रूप ले पाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों के बीच भरोसे की एक गहरी और पुरानी कमी बनी हुई है जो अतीत में हुए युद्धविराम उल्लंघनों और खाड़ी क्षेत्रों में लगातार जारी सैन्य जमावड़े के कारण और भी बढ़ गई है।"

'अमेरिका और ईरान किसी समझौते से काफी दूर'

न्यूज 18 ने शीर्ष खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया है कि शांति प्रक्रिया पूरी तरह से एक अप्रत्यक्ष ढांचे के जरिए आगे बढ़ रही है। इन बेहद संवेदनशील बातचीत में फिलहाल पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और इसमें औपचारिक संदेश और कूटनीतिक दस्तावेज सीधे आमने-सामने की बातचीत के बजाय मध्यस्थों के जरिए ही भेजे-मंगाए जा रहे हैं। ईरानी नेतृत्व इस समय वाइट हाउस से मिले सबसे ताजा जवाब की समीक्षा कर रहा है। यह जवाब तेहरान की तरफ से इस महीने की शुरुआत में संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए पेश किए गए 14-सूत्रीय व्यापक शांति प्रस्ताव के संदर्भ में आया है।
वरिष्ठ खुफिया अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि मौजूदा कूटनीतिक बातचीत का दायरा बेहद सीमित है। बातचीत को तत्काल टूटने से बचाने के लिए दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से जटिल और दीर्घकालिक विवादों को फिलहाल किनारे रखने का फैसला किया है। इसका मुख्य मकसद फिर से लड़ाई शुरू होने से रोकना, स्थानीय स्तर पर सैनिकों को पीछे हटाना, होर्मुज स्ट्रेट से फिर से जहाजों की आवाजाही बहाव करना और क्षेत्रीय शांति स्थापित करना है। इसके अलावा परमाणु विवाद को फिलहाल किनारे पखा गया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बगाई ने स्पष्ट रूप से पुष्टि की है कि शांति प्रक्रिया के इस चरण में परमाणु मुद्दे से जुड़े विशिष्ट विवरणों पर न तो सक्रिय रूप से चर्चा की जा रही है और न ही उनका मूल्यांकन किया जा रहा है।

ईरान के संवर्धित यूरेनियम पर विवाद जारी

खुफिया सूत्रों के हवाले से न्यूज 18 ने बताया है कि मुख्य अड़चनें अभी भी ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार और परमाणु शोधन के उसके घरेलू अधिकार के इर्द-गिर्द ही घूम रही हैं। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने लगातार यह मांग की है कि ईरान के मौजूदा संवर्धित सामग्री पर सख्त और सत्यापन योग्य सीमाएं लगाई जाएं। ट्रंप की तरफ से शर्त रखा गया है कि ईरान पर प्रतिबंध हटाने के लिए इसे देश से यूरेनियम बाहर निकाला महत्वपूर्ण है। लेकिन तेहरान के वार्ताकारों ने इन शर्तों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश नीति से जुड़े लोग अपनी घरेलू संवर्धन क्षमताओं को एक पूर्ण और गैर-समझौता योग्य संप्रभु अधिकार के रूप में देखते हैं जिसे किसी अस्थायी सैन्य विराम के बदले में नहीं छोड़ा जा सकता।हालांकि पाकिस्तान की बैकचैनल कूटनीति ने दोनों विरोधियों के बीच बातचीत का एक रास्ता सफलतापूर्वक बना लिया है लेकिन बगाई की सार्वजनिक सावधानी इस बात का संकेत देती है कि कोई औपचारिक "लिखित समझौता" अभी भी दूर है। दूसरी तरफ सीबीसी न्यूज ने बताया है कि अमेरिका शुक्रवार को ही ईरान पर नये हमलों की शुरूआत करने वाला था और वॉशिंगटन में हलचल तेज है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी वीकेंड छुट्टी कैंसिल कर दी है और आशंका जताई जा रही है कि ईरान युद्ध फिर शुरू हो सकता है।

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