ईरान युद्ध के बीच सरकार ने दो महीने में जुटाए 20,000 करोड़
Updated on
10-06-2026
नई दिल्ली: ईरान युद्ध के बीच सरकार ने इस फाइनेंशियल ईयर के पहले दो महीने में विनिवेश और एसेट की बिक्री से लगभग 20,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण कच्चे तेल और फर्टिलाइजर्स की कीमत में काफी तेजी आई है। इससे सरकार का सब्सिडी का खर्च बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार गैर-टैक्स रेवेन्यू के जरिए संसाधन जुटाने की अपनी रणनीति पर काम कर रही है। अब तक जुटाया गया फंड पूरे साल के टारगेट का लगभग 25% है। सरकार ने इस साल 80,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा है।खाद मंत्रालय ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में सब्सिडी को दोगुना करने की मांग की है। फर्टिलाइजर्स के लिए इस साल बजट में 1.7 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी का प्रावधान किया गया था। साथ ही सरकार घरेलू कंपनियों को भी खाद का उत्पादन बढ़ाने के लिए कह रही है। ईरान युद्ध के कारण जहाजों की उपलब्धता को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है और कई खाद सप्लायर बाजार से हट रहे हैं।गैस सिलेंडर पर सब्सिडी
इसके अलावा कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के असर को कम करने के लिए केंद्र ने सरकारी तेल कंपनियों को 1.2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की मदद दी है। इसमें एक्साइज ड्यूटी में कटौती भी शामिल है। तेल कंपनियों ने हाल में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतें बढ़ाई हैं। आगे भी किस्तों में कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं। साथ ही केंद्र को गैस सिलेंडर के लिए भी सब्सिडी देनी होगी क्योंकि तेल कंपनियों को अब भी रोजाना करीब 700 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
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