24 कोच वाली वंदे भारत ट्रेन के लिए रेलवे का बड़ा प्रोजेक्ट, साबरमती में 307 करोड़ रुपये से बन रहा आधुनिक मेंटेनेंस हब

Updated on 18-10-2026
नई दिल्ली: गुजरात के साबरमती में वंदे भारत ट्रेनों के रखरखाव के लिए 307 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक मेंटेनेंस हब बनाया जा रहा है। पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद डिवीजन की ओर से इस परियोजना पर काम किया जा रहा है। इसके तहत भारी मरम्मत के लिए बनने वाला शेड लगभग तैयार हो चुका है, जबकि पहियों की मरम्मत के लिए बनाया गया शेड भी पूरा हो गया है।

यह परियोजना साबरमती के इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो (ICD) के दूसरे चरण का हिस्सा है। इसका उद्देश्य वंदे भारत ट्रेनों की नियमित और बड़ी मरम्मत के लिए जरूरी सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध कराना है। इससे ट्रेनों को बड़ी मरम्मत के लिए दूसरे शहरों में भेजने की जरूरत कम होगी।

वंदे भारत ट्रेनों की होगी मरम्मत

इस मेंटेनेंस हब को 24 कोच वाली वंदे भारत ट्रेनों की नियमित जांच और रखरखाव के लिए तैयार किया जा रहा है। यहां दो तरह की निर्धारित मरम्मत की सुविधा होगी, जिन्हें SS-I और SS-II कहा जाता है।

योजना के मुताबिक, 24 कोच वाली एक ट्रेन की SS-I मरम्मत में करीब 30 दिन लगेंगे, जबकि SS-II मरम्मत में लगभग 45 दिन लग सकते हैं। इस डिपो में सालाना करीब 12 ट्रेनों की SS-I या आठ ट्रेनों की SS-II मरम्मत करने की क्षमता होगी।

मेंटेनेंस की दो लाइनें होंगी

  • परियोजना के तहत बनने वाला भारी मरम्मत शेड 322 मीटर लंबा और 25 मीटर चौड़ा है। इसका कुल क्षेत्रफल 86,597 वर्ग फुट है। यह शेड लगभग तैयार हो चुका है और इसमें दो मेंटेनेंस लाइनें होंगी।
  • पहली लाइन में विशेष जैक की मदद से ट्रेन के कोच उठाए जा सकेंगे और उनके पहियों के नीचे लगे बोगी सिस्टम को हटाकर मरम्मत की जा सकेगी।
  • दूसरी लाइन में कोच के अंदरूनी हिस्सों, यात्रियों की सुविधाओं, ब्रेक सिस्टम और बिजली से जुड़े उपकरणों की देखभाल की जाएगी।
  • इसके अलावा एक अन्य शेड में ट्रेन के महत्वपूर्ण मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल उपकरणों को खोलने, उनकी मरम्मत करने और दोबारा जोड़ने की सुविधा होगी।

पहियों की मरम्मत के लिए शेड तैयार

साबरमती में पहियों और एक्सल की मरम्मत के लिए बनाया गया शेड भी पूरा हो चुका है। यह 75 मीटर लंबा और 40 मीटर चौड़ा है। इसका क्षेत्रफल 32,292 वर्ग फुट है। यह शेड और इससे जुड़ी सर्विस बिल्डिंग हैंडओवर के लिए तैयार हैं।
यहां ट्रेन के पहियों और एक्सल की ओवरहॉलिंग, सतह को दोबारा ठीक करने और पहियों की गोलाई सुधारने जैसे काम किए जाएंगे। इसके लिए कंप्यूटर से चलने वाली मशीनें, व्हील बैलेंसिंग मशीन और हाइड्रोलिक व्हील प्रेस जैसे उपकरण लगाए जाएंगे।

यह काम भी आगे बढ़ा

मेंटेनेंस हब में चार स्टेबलिंग लाइनों पर करीब 2,547 मीटर तक रेल ट्रैक बिछाने का काम पूरा हो गया है। भारी मरम्मत शेड की दोनों मेंटेनेंस लाइनों का काम भी लगभग पूरा हो चुका है।

इसके साथ ही 30 मीटर लंबी और 20 मीटर चौड़ी बिजली सब-स्टेशन बिल्डिंग का निर्माण पूरा कर उसे रेलवे को सौंप दिया गया है। यह इमारत पूरे डिपो की बिजली संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी।

एक ही परिसर में मरम्मत की कई सुविधाएं

परियोजना पूरी तरह चालू होने के बाद साबरमती में वंदे भारत ट्रेनों के कोच, बिजली के उपकरणों और पहियों की मरम्मत के लिए अलग-अलग सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी। इससे पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद डिवीजन की आधुनिक ट्रेनों के रखरखाव की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

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