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आरोप है कि ये लोग सार्वजनिक जगहों पर जैविक टॉक्सिन के जरिए हजारों लोगों को जहर देने की साजिश कर रहे थे। चार्जशीट में हैदराबाद के डॉ. सैयद अहमद मोहीउद्दीन और यूपी के आजाद व मोहम्मद सुहेल के नाम हैं।
चार्जशीट क अहमदाबाद में स्पेशल एनआईए कोर्ट में दाखिल किया है।जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी अपने-अपने आईएसआईएस से जुड़े विदेशी हैंडलर्स के निर्देश पर मिलकर काम कर रहे थे।
वे हैंडलर्स से प्रभावित और कट्टरपंथ की ओर धकेले गए युवाओं को भर्ती कर जिहाद के समर्थन और प्रतिबंधित हथियारों व बायोटेररिज्म के जरिए दहशत फैलाने की योजना बना रहे थे। एजेंसी के अनुसार साजिश में रिसिन का इस्तेमाल करने की तैयारी थी।
सुहेल के काम में हैंडलरों से संपर्क बनाए रखना
एजेंसी के अनुसार आजाद और सुहेल के काम में हैंडलरों से संपर्क बनाए रखना, आतंकी गतिविधियों के लिए धन प्रबंधन, रेकी करना और अवैध हथियारों की आपूर्ति शामिल थी।
सुहेल को हैंडलर और अन्य सदस्यों के बीच मुख्य कड़ी बताया गया है। वह भर्ती, और धन व हथियारों की खेप के प्रबंधन में मदद करता था।
एजेंसी के अनुसार वह बातें वीडियो पर रिकॉर्ड करता था। आईएसआईएस के झंडे भी तैयार किए।
घर पर ही बना रखी थी लैब
NIA ने जनवरी 2026 में जांच अपने हाथ में लिया। एजेंसी के अनुसार, मोहिउद्दीन को उसके हैंडलर द्वारा दक्षिण एशिया में आईएसआईएस का ‘अमीर’ (सरगना) बनाने का वादा किया गया था। उसने हैदराबाद स्थित अपने घर को राइसिन तैयार करने के लिए एक खुफिया लैब में बदल दिया था।
आजाद व सुहेल कथित तौर पर राजस्थान के हनुमानगढ़ में एक स्थान से नकदी और प्रतिबंधित हथियारों से भरे पार्सल एकत्र कर रहे थे। इसे गुजरात के छत्राल में एक स्थान पर जमा किया था।
क्या होता है बायो टेररिज्म
बैक्टीरिया, वायरस या जहरीले जैविक पदार्थों का इस्तेमाल लोगों, पशुओं या फसलों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाता है।