17 साल में ब्रॉन्ज, 22 में सिल्वर और अब 25 की उम्र में फिर इतिहास, जानें कौन हैं रोशिबिना देवी, जिन्होंने वुशू में लगाया मेडल्स का हैट्रिक

Updated on 24-09-2026
जापान के नागोया स्थित आइची प्रेफेक्चरल मार्शल आर्ट्स हॉल में जब भारत का तिरंगा फहराया गया, तो पोडियम पर खड़ी नाओरेम रोशिबिना देवी की आंखों में खुशी के साथ-साथ बीते कुछ महीनों के संघर्ष का दर्द भी साफ झलक रहा था। महिलाओं के 60 किग्रा सांडा इवेंट के फाइनल मुकाबले में भले ही चीन की शक्तिशाली फाइटर झांग शियाओयु ने रोशिबिना को 2-0 से हराकर गोल्ड से दूर कर दिया, लेकिन रोशिबिना ने जो हासिल किया, वह भारतीय खेल इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था। 25 साल की यह मणिपुरी फाइटर एशियन गेम्स के इतिहास में लगातार तीन पदक जीतने वाली भारत की पहली वुशू खिलाड़ी बन गईं। चीन और ईरान जैसे मजबूत देशों के दबदबे वाले खेल वुशू में रोशिबिना का यह कारनामा किसी चमत्कार से कम नहीं है, लेकिन इस चमकते हुए सिल्वर मेडल के पीछे की राह बेहद पथरीली, दर्दनाक और उतार-चढ़ाव से भरी रही है।


17 साल की उम्र में शुरू हुआ था सफर

मणिपुर के एक बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली रोशिबिना ने बहुत कम उम्र में वुशू के कठिन खेल (सांडा श्रेणी, जो फुल-कॉन्टैक्ट कॉम्बैट स्पोर्ट्स है) में कदम रखा था। महज 17 साल की उम्र में रोशिबिना ने दुनिया को अपनी प्रतिभा से चौंकाते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता। 22 साल की उम्र में उन्होंने अपने प्रदर्शन को और निखारा और देश के लिए सिल्वर मेडल हासिल किया। 2026 आइची-नागोया एशियन गेम्स में 25 साल की उम्र में दोबारा सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने एशियन गेम्स में मेडल्स की हैट्रिक पूरी कर ली। एशियन गेम्स में भारत का यह वुशू में कुल 11वां मेडल था, लेकिन तीन पदकों पर अकेला नाम इस मणिपुर की स्टार का दर्ज है।

टीम से बाहर, घुटने की चोट और सिलेक्शन का हाई वोल्टेज ड्रामा

नागोया पहुंचने से ठीक एक महीने पहले तक रोशिबिना देवी का एशियन गेम्स 2026 में खेलना लगभग नामुमकिन नजर आ रहा था। पिछले साल घुटने की गंभीर चोट से जूझने के बाद, जब राष्ट्रीय चयन ट्रायल हुए तो रोशिबिना युवा फाइटर दिव्यांशी चौधरी से हार गईं। 22 अगस्त को खेल मंत्रालय द्वारा जारी 7 सदस्यीय आधिकारिक भारतीय वुशू टीम से रोशिबिना का नाम पूरी तरह गायब था। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। चीन के हुबेई में आयोजित एससीओ वुशू चैंपियनशिप के दौरान दिव्यांशी चौधरी का नी लिगामेंट चोटिल हो गया। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर भारतीय वुशू संघ ने रोशिबिना को लास्ट मिनट इंजरी रिप्लेसमेंट के तौर पर टीम में शामिल कर लिया।
इसके बाद विवाद का बड़ा बवंडर उठा। टीम से हटाई गई दिव्यांशी ने सोशल मीडिया पर रोशिबिना पर मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए, जिससे खेल गलियारे में भूचाल आ गया। एक तरफ आरोप-प्रत्यारोप का मानसिक तनाव था, तो दूसरी तरफ बिना पर्याप्त तैयारी के रिंग में उतरने की चुनौती। हालांकि, भारतीय वुशू संघ और खेल मंत्रालय ने सख्त स्टैंड लेते हुए मेडिकल आधार पर रोशिबिना की न सिर्फ वापसी कराई, बल्कि उन्हें नागोया भेजा।


विवादों का जवाब रिंग में रिंग मास्टर बनकर दिया

तमाम मानसिक दबाव, विवादों और बिना तैयारी के मैदान में उतरने के बावजूद रोशिबिना का ध्यान सिर्फ अपने लक्ष्य पर था। मकाऊ की चू मन सिन को 5-0 से एकतरफा रौंदकर मेडल पक्का किया। इसके बाद सेमीफाइनल में इंडोनेशिया की थानिया कुसुमानिंगत्यास को 2-0 से शिकस्त देकर खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया। हालांकि फाइनल में चीन की दिग्गज झांग शियाओयु के आगे वे 0-2 से हार गईं, लेकिन उन्होंने जो हिम्मत दिखाई, उसने पूरे देश का दिल जीत लिया।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें