CNG और PNG नेटवर्क को मिलेगी रफ्तार, प्रदूषण की NOC मिलेगी अब 15 दिन में, LPG की निर्भरता होगी कम

Updated on 28-10-2026
नई दिल्ली : पाइपलाइन से रसोई गैस (PNG) और गाड़ियों के लिए सीएनजी (CNG) का नेटवर्क बढ़ाने की प्रक्रिया अब तेज होगी। CPCB ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) से जुड़ी परियोजनाओं के लिए प्रदूषण विभाग की मंजूरी देने की समयसीमा 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दी है। इससे गैस पाइपलाइन बिछाने और गैस सप्लाई का ढांचा तैयार करने वाली कंपनियों को राहत मिलेगी। इसका मकसद स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल बढ़ाना और एलपीजी की आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं को कम करना है।

सीपीसीबी के मेंबर सेक्रेटरी प्रसून गर्गव की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रदूषण नियंत्रण समितियों को सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन परियोजनाओं से जुड़े आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा करना होगा। इसमें स्थापना के लिए सहमति (CTE) और संचालन के लिए सहमति (CTO) से जुड़े आवेदन शामिल हैं। यह निर्देश प्रदूषण नियंत्रण कानून की धारा 18(1)(b) के तहत जारी किया गया है।

LPG पर निर्भरता घटाने की कोशिश

घरेलू रसोई में पीएनजी का इस्तेमाल बढ़ने से एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं, होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल और दूसरे व्यावसायिक संस्थानों में प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल बढ़ने से स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा मिलेगा। सीपीसीबी ने फरवरी 2025 में तेल और गैस की परिवहन पाइपलाइनों को ग्रीन श्रेणी में रखा था। इससे इन परियोजनाओं के लिए मंजूरी की प्रक्रिया आसान बनाने की दिशा में कदम उठाया गया था।


गैस नेटवर्क के विस्तार को मिलेगी रफ्तार

मंजूरी की समयसीमा घटने से गैस वितरण कंपनियों को पाइपलाइन बिछाने और नए इलाकों तक कनेक्शन पहुंचाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, परियोजनाओं को प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों का पालन करना होगा। इस कदम से शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता बढ़ानेको गति मिलने की उम्मीद है।

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