EOW के नोटिस में अपराध क्रमांक 03/2024 का उल्लेख किया गया है। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं 7, 7A और 12 के साथ IPC की धाराएं 420, 120-B, 384, 467, 468 और 471 का हवाला दिया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार विवेचना पूरी होने के बाद अभियोग पत्र विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, रायपुर के सामने पेश किया जाना है।
इससे पहले 28 सितंबर को EOW ने देवेंद्र यादव को पूछताछ के लिए बुलाया था। यादव रायपुर स्थित EOW कार्यालय पहुंचे थे। यहां उनसे दो घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की गई थी। अब 5 अक्टूबर को विशेष न्यायालय में उपस्थिति के निर्देश दिए गए हैं।
540 करोड़ की कथित अवैध वसूली से जुड़ा मामला
कोल लेवी मामले में जांच एजेंसियों ने करीब 540 करोड़ रुपए की कथित अवैध वसूली का आरोप लगाया है। जांच के मुताबिक, जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच कोयला परिवहन में प्रति टन 25 रुपए की कथित अवैध वसूली की व्यवस्था का आरोप है।
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई भी पहले सामने आ चुकी है। देवेंद्र यादव का नाम जांच से जुड़े दस्तावेजों में सामने आने की बात रिपोर्टों में कही गई है। देवेंद्र यादव इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं।
जानिए क्या है छत्तीसगढ़ का कोयला लेवी घोटाला
ED का दावा है कि छत्तीसगढ़ में कोयला घोटाला किया गया है। इस मामले में 36 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। ईडी का आरोप है कि कोयले के परिचालन, ऑनलाइन परमिट को ऑफलाइन करने समेत कई तरीकों से करीब 570 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध वसूली की गई है।
छत्तीसगढ़ में अवैध कोल लेवी वसूली का मामला ईडी की रेड में सामने आया था। दावा है कि, कोल परिवहन में कोल व्यापारियों से वसूली करने के लिए ऑनलाइन मिलने वाले परमिट को ऑफलाइन कर दिया गया था। खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक आईएएस समीर विश्नोई ने 15 जुलाई 2020 को इसके लिए आदेश जारी किया था।
2 पूर्व मंत्रियों, विधायकों समेत 36 पर FIR
छत्तीसगढ़ में कोयला घोटाले मामले में ED की रिपोर्ट पर ACB /EOW ने दो पूर्व मंत्रियों, विधायकों सहित 36 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। जिस पर अब ACB-EOW की टीम जांच कर रही है।
इस मामले में IAS रानू साहू के अलावा IAS समीर विश्नोई, सौम्या चौरसिया, जेडी माइनिंग एसएस नाग और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी को गिरफ्तार किया गया था।
सूर्यकांत तिवारी की क्या थी भूमिका
ईडी की जांच के मुताबिक सूर्यकांत तिवारी ने कोयला परिवहन और परमिट प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं के जरिए करोड़ों की अवैध वसूली का मास्टरमाइंड माना गया है।
आरोप है कि प्रति टन 25 रुपए की दर से वसूली कर रकम उसके कर्मचारियों के जरिए जमा कराई जाती थी, और इसके बदले संबंधित व्यापारियों को खनिज विभाग से परमिट जारी किए जाते थे।