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">आतंकी मूवमेंट की जानकारी मिलने के बाद सुरक्षाबलों का जंगल में सर्च ऑपरेशन जारी है। इसी दौरान आतंकियों ने फायरिंग की।
इसी साल फरवरी में भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर ने किश्तवाड़ से आतंक के नेटवर्क का खात्मा का ऐलान किया था।
सेना ने X पर 7 आतंकियों की फोटो पोस्ट की थी। इसमें लिखा था- 326 दिन के बाद किश्तवाड़ से आतंक के नेटवर्क का खात्मा हुआ।
पोस्ट में कहा गया था कि इन आतंकियों में जैश का कमांडर सैफुल्लाह भी मारा गया है। सैफुल्लाह किश्तवाड़ में आतंक का सरगना था।
व्हाइट नाइट कोर ने बताया था कि किश्तवाड़ में उनके अलावा जम्मू कश्मीर पुलिस और CRPF समेत सेना की इंटेलीजेंस एजेंसी भी शामिल रहीं।
2026 में सेना के 2 ऑपरेशन
ऑपरेशन त्राशी-1: यह ऑपरेशन 18 जनवरी को चतरू बेल्ट के मंडराल-सिंहपोरा के पास सोनार गांव के जंगलों में शुरू किया गया था। पहले एनकाउंटर में 8 जवान घायल हुए थे, जिनमें से हवलदार गजेंद्र सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
इसके बाद 22 और 24 जनवरी को अलग-अलग मुठभेड़ हुईं, जबकि 31 जनवरी को डोलगाम इलाके में फिर से गोलीबारी हुई थी। चतरू में 3 आतंकियों के खात्मे के साथ यह खत्म हो गया है।
ऑपरेशन ‘किया: व्हाइट नाइट कोर ने 4 फरवरी को CIF डेल्टा, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF के साथ बसंतगढ़ के जोफर फॉरेस्ट एरिया में जॉइंट ऑपरेशन चलाया था।
सुरक्षा बलों ने आतंकियों पर UBGLs (अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर) का इस्तेमाल किया। जिससे गुफा के एक हिस्से को विस्फोट के जरिए ध्वस्त कर दिया गया। इस विस्फोट में दोनों आतंकी मारे गए।