चीन के J-20 का फ्रांस ने बनाया तोड़, भारत को मिलने जा रहा 'ड्रोन कमान वाला' Rafale F5, टेंशन खत्म

Updated on 19-08-2026
पेरिस: फ्रांस राफेल लड़ाकू विमान के F5 वैरिएंट को एक बहुत ज्यादा अपग्रेड किए गए 4.5-जेनरेशन फाइटर के तौर पर विकसित कर रहा है। यह एक नेटवर्क वाले 'फ्लाइंग कमांड सेंटर' की तरह काम करेगा। इसमें AI से कंट्रोल होने वाले 'लॉयल विंगमैन' ड्रोन जो न्यूरॉन प्रोजेक्ट से विकसित हुए हैं उनका इस्तेमाल किया जाएगा। इससे इसकी सेंसिंग क्षमता काफी बढ़ जाएगी। भारत के लिए ये महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि चीन के पास दो तरह के पांचवीं पीढ़ी के विमान J-20 और J-35A हैं। ये स्टील्थ विमान हैं। लेकिन राफेल-F5 से चीनी स्टील्थ विमानों का टेंशन खत्म हो जाता है।


J-20 की स्टील्थ क्षमता को कैसे खत्म करेगा Rafale F5?

यूरेशिया रिव्यू के मुताबिक चीन के J-20 के खिलाफ F5 को आमने-सामने की स्टील्थ लड़ाई के लिए नहीं बनाया गया है। बल्कि इसके ड्रोन आगे से ही टारगेट का पता लगाते हैं और उन पर हमला करते हैं ताकि पायलट वाला जेट सुरक्षित रहकर लड़ सके। वहीं इसके बाहरी हार्ड-पॉइंट्स इसे जमीन पर हमला करने के लिए बेहतर पेलोड क्षमता देते हैं। भारत पहले एक्सपोर्ट कस्टमर के तौर पर 24 एयरक्राफ्ट का ऑर्डर देने पर विचार कर रहा है और फ्रांस की सेना में इसे 2030-2033 के बीच शामिल करने की योजना है।
भारत फाइटर जेट टेक्नोलॉजी में एक बड़ा बदलाव देख रहा है। MRFA (मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट) प्लान के तहत भारत 114 नए राफेल जेट खरीदना चाहता है और एडवांस्ड राफेल F5 टाइप के 24 जेट शामिल करने पर बातचीत चल रही है। चीन हवा में मजबूत हो रहा है खासकर अपने J-20 स्टील्थ फाइटर के साथ और दिल्ली इस चुनौती का जवाब देने के लिए बेहतर हथियार चाहती है।

फ्रांस ने एक समझदारी भरा रास्ता चुना है। अमेरिकी F-22 और F-35 जैसे पूरी तरह से पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ जेट बनाने की दौड़ में शामिल होने के बजाय उसने अपने भरोसेमंद 4.5-जेनरेशन लड़ाकू विमान को ही स्टील्थ विमानों से मुकालबा करने वाला घातक जेट बना दिया है।

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