' मैं महिमा -मंडन नहीं ,सूक्ष्म विवेचना में विश्वास करता हूं'
बहुचर्चित कृति'महानायक मोदी' के लेखक कृष्ण मोहन झा से साक्षात्कार
हिन्दी पत्रकारिता में कृष्ण मोहन झा ऐसा नाम नहीं है जिसे किसी परिचय की आवश्यकता हो | वे लगभग ढाई दशक से देश के सुप्रतिष्ठित समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में नियमित लेखन कर रहे हैं |उन्होंने निष्पक्ष राजनीतिक विश्लषेक और प्रखर पत्रकार के रूप में जो विशिष्ट पहचान बनाई है उसे अपने ढाई दशक के पत्रकारीय जीवन में कभी धूमिल नहीं होने दिया | श्री कृष्ण मोहन झा की अब तक पांच कृतियों का प्रकाशन हो चुका है |राजनीतिक लेख संग्रह'सियासतनामा'उनकी पहली कृति थी | राष्ट्रहित और समाज हित से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर उनके विचार प्रबुद्घ वर्ग के पाठकों को सोचने के लिए विवश कर देते हैं |राजनीतिक विश्लेषक के रूप में कृष्ण मोहन झा पर आप न तो पूर्वाग्रही होने का आरोप लगा सकते हैं और न ही उन्हें किसी विशेष विचारधारा से प्रभावित ठहरा सकते हैं | वे नकारात्मक आलोचना नहीं सूक्ष्म विवेचना में विश्वास रखते हैं |हाल में ही ' महानायक मोदी ' शीर्षक से उनकी एक और पुस्तक का प्रकाशन हुआ है जिसकी राजनीतिक गलियारों एवं बुद्धिजीवी वर्ग के पाठकों के बीच बहुत चर्चा हो रही है और बधाईयां भी मिल रही
हैं |उल्लेखनीय है कि लगभग दो वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रथम कार्य काल की ऐतिहसिक उपलब्धियों और साहसिक फैसलों की आलोचनात्मक विवेचना करने वाली उनकी पुस्तक ' यशस्वी मोदी ' ने भी सफलता के कीर्तिमान स्थापित किए थे |विगत दिनों कृष्ण मोहन झा ने एक साक्षात्कार में अपनी नवीनतम कृति 'महानायक मोदी' से जुड़े अनेक प्रश्नों के बेबाकी से जवाब दिए |यहां हम उस साक्षात्कार के मुख्य अंश प्रकाशित कर रहे हैं -
प्रश्न :इन दिनों आपकी नवीनतम कृति 'महानायक मोदी 'की बहुत चर्चा हो रही है |चारों ओर से बधाईयां भी मिल रही हैं |आप इसे किस तरह देखते हैं |
कृष्ण मोहन झा:मुझे खुशी है कि एक राजनीतिक विश्लेषक के रूप में मैं जो कुछ भी लिखता हूं उसे न केवल पढा जाता है बल्कि उस पर चर्चा भी होती है | यही एक लेखक की सबसे बड़ी सफलता है |मैं हर प्रतिक्रिया का पूरा सम्मान करता हूं |
प्रश्न :'महानायक मोदी'कृति की विषय वस्तु के बारे में कुछ बताइए?
कृष्ण मोहन झा:अपनी इस पुस्तक में मैंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वितीय कार्यकाल के पहले साल की महत्वपूर्ण उपलब्धियों और उन साहसिक फैसलों की समीक्षा की है जो प्रधानमंत्री मोदी की विलक्षण कार्य
शैली और अद्भुत इच्छाशक्ति की परिचायक हैं| प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तित्व और कृतित्व की इन विशेषताओं की चर्चा हर जगह हो रही है |राजनीतिक विश्लेषक के रूप में मैने भी अपने निष्पक्ष विचार व्यक्त किए हैं |यह मेरी जिम्मेदारी भी है और अधिकार भी |
प्रश्न :प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा में आपकी अतीत में भी एक कृति 'यशस्वी मोदी'शीर्षक से बाजार में आ चुकी है और वह काफी चर्चित भी रही परंतु मोदी का महिमामंडन वाली लगातार दूसरी कृति के
प्रकाशन का कोई विशेष प्रयोजन है ?
कृष्ण मोहन झा: प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक उपलब्धियों ,साहसिक फैसलों .
क्रांतिकारी कदमों के बारे में जितना भी लिखा जाए कम है |मैं हमेशा निष्पक्ष लेखना करता हूं | महिमा मंडन में मेरा कभी विश्वास नहीं रहा लेकिन देश की तस्वीर और तकदीर बदलने के लिए उनकी सरकार ने जो क्रांतिकारी कदम उठाए और अंतर्राष्ट्रीय जगत में भारत के लिए जो प्रतिष्ठा अर्जित की उसका उचित मूल्यांकन तो होना ही चाहिए | महिमा मंडन शब्द का आरोप मुझे स्वीकार्य नहीं है | आप उसे निष्पक्ष विवेचना कह सकते हैं | 'महानायक मोदी' कृति का लेखन मैंने तब प्रारंभ किया था जब 17वीं लोकसभा के चुनावों की घोषणा हो चुकी थी |नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उनकी पार्टी ने उन चुनें में जो प्रचण्ड विजय हासिल की उसने उन्हें इस महादेश का महा नायक बना दिया|
दूसरे कार्यकाल के पहले साल की चमकदार उपलब्धियों और साहस पूर्ण फैसलों ने यह साबित भी कर दिया कि मोदी के अंदर एक महानायक के सारे गुण कूट कूट कर भरे हैं |प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल के प्रथम वर्ष में जो साहसिक कदम उठाए उसमें उनके महानायकत्व की झलक स्पष्ट देखी जा सकती है |यही मेरी इस पुस्तक की विषय वस्तु है लेकिन 'महानायक मोदी 'कृति को 'यशस्वी मोदी' कृति का स़ीक्वल कहना उचित नहीं होगा |
प्रश्न : क्या आप खुद को किसी विचारधारा से प्रभावित मानते हैं?
कृष्ण मोहन झा:मैं हमेशा निर्भीक और निष्पक्ष विश्लेषण करता हूं |मुझे जो ठीक लगता है उसे सही ठहराता हूं और जो ठीक नहीं लगता उस पर अपनी सकारात्मक राय देता हूं | मैं सूक्ष्म विवेचना में विश्वास करता हूं, नकारात्मक आलोचना में नहीं?
प्रश्न :सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से
आपके मधुर संबंध हैं |क्या इसका संबंध कभी आपके लेखन को प्रभावित नहीं करता?
कृष्ण मोहन झा: नहीं, मैं अपनी लेखनी से कभी समझौता नहीं करता | वे अपना काम कर रहे हैं, मैं अपना काम करता हूं |मैं पहले ही कह चुका हूँ कि मैं पक्ष या विपक्ष में नहीं
निष्पक्ष होने में विश्वास रखता हूं |
प्रश्न :क्या आप ऐसा नहीं मानते कि 'महा नायक मोदी 'कृति बाजार में आने में कुछ विलंब हो गया?
कृष्ण मोहन झा: मैं आपकी इस बात से सहमत हूं | यह पुस्तक पिछले साल के अंत तक बाज़ार में लाने की योजना थी परंतु फिर नए साल में प्रकाशित करने का विचार
आया परंतु नए साल में कोरोना संकट के कारण इसे स्थगित करने के लिए विवश होना पड़ा |मैं मानता हूं कि मेरी इस महत्वाकांक्षी कृति के विमोचन के लिए प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस के अवसर से बेहतर और कोई तिथि नहीं हो सकती थी |आपको मालूम ही होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस पर ही नई दिल्ली में केंद्रीय इस्पात राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने इस पुस्तक का विमोचन किया था
प्रश्न:अंत में इतना और बताइए कि आपकी
अगली पुस्तक की विषय वस्तु क्या होगी और उसे बाजार में कब तक लाने की
योजना है?
कृष्ण मोहन झा: इस समय सारी दुनिया कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में है |
दुर्भाग्य से हमारे देश में यह संकट भयावह रूप ले चुका है | अभी इसी पर पुस्तक लिखने में व्यस्त हूं | अगले दो तीन माह के अंदर उसे प्रकाशित करने की योजना है |