लंदन: ब्रिटेन के पूर्व कैबिनेट मंत्री सर विंस केबल ने भारत की जमकर तारीफ करते हुए उसे एक स्विंग कंट्री कहा है। उन्होंने कहा कि भारत उन देशों में सबसे अहम है जिनके रुख में बदलाव हमारे अंतरराष्ट्रीय सिस्टम के काम करने के तरीके को पूरी तरह से बदल सकता है। उन्होंने भारत के किसी एक पक्ष में न होने और बहुध्रुवीय व्यवस्था वाले नजरिए पर जोर दिया और बताया कि किस तरह वह भविष्य में दुनिया को बदलने की क्षमता रखता है।भारत के साथ जुड़ने पर जोर
ब्रिटेन के व्यापार और उद्योग मंत्री रह चुके विंस केबल ने एक पॉडकास्ट में यह बात कही। इस पॉडकास्ट में उन्होंने जोर दिया कि पश्चिम को भारत के साथ समझदारी से जुड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि भारत सच में कई मायनों में इस नई दुनिया में एक स्विंग कंट्री है। यह शायद उन देशों में सबसे जरूरी है, जिनकी दिशा बदलने से इंटरनेशनल सिस्टम के काम करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। स्विंग कंट्री उन्हें कहा जाता है जो वैश्विक व्यवस्था में निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता रखते हैं।उन्होंने भारत की विदेश नीति पर फोकस किया और कहा कि इसे दो दिशाओं में खींचा गया है। एक है ज्यादा पारंपरिक नॉन-अलाइंड एप्रोच, जो रूस के साथ उनके अच्छे रिश्तों के हिसाब से सही लगता है। केबल ने चीन के साथ भारतीय सहयोग का भी जिक्र किया और कहा, वे शंघाई कॉर्पोरेशन (SCO) जैसे संगठन में चुपके से जाते हैं। वे चीन के नेतृत्व वाले एशिया इंफ्रास्ट्रक्चर बैंक के एक्टिव मेंबर हैं। इस तरह के बहुत सारे फैक्टर हैं।
भारतीयों को चीन से खतरा
पूर्व ब्रिटिश मंत्री ने इसी पॉडकास्ट में आगे कहा कि जब मैं दिल्ली में लोगों से खासकर सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों से बात करता हूं कि यह साफ है कि लंबे समय के नजरिए से उन्हें चीन से बड़ा खतरा दिखता है। चाहे वह मिलिट्री के मामले में हो, इकॉनमी के मामले में या पाकिस्तान और दूसरी जगहों पर दुश्मन पड़ोसी देशों से घिरे होने के मामले में। जब मुश्किल समय आता है तो वे अमेरिका के साथ गठबंधन की बात करते हैं।भारत को अमेरिका पर अब भरोसा नहीं
हालांकि, उन्होंने आगे कहा कि अब डोनाल्ड ट्रंप की वजह से भारत में लोगों को अमेरिका को लेकर बड़ा झटका लगा है। ट्रंप की पाकिस्तान के जनरल असीम मुनीर के साथ नजदीकी है। टैरिफ और ट्रेड पॉलिसी को लेकर वे बहुत आक्रामक रहे हैं और इमिग्रेशन के मुद्दों पर भारतीयों को नीचा दिखाते हैं। विंस केबल ने कहा कि भारतीयों को एहसास हुआ है कि अमेरिका के साथ रिश्ता एकतरफा है। उन्हें लंबे समय में अमेरिका की जरूरत है, लेकिन अमेरिका उनमें बहुत कम दिलचस्पी दिखाता है।