पेट्रोल-डीजल के एक्सपोर्ट से बढ़ गई भारत की कमाई

Updated on 27-10-2026
नई दिल्ली: भारत अपनी जरूरत का करीब 90% कच्चा तेल आयात करता है। लेकिन भारत भारी मात्रा में रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का निर्यात करता है। इस फाइनेंशियल ईयर में अप्रैल-सितंबर के दौरान भारत से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में करीब 16% गिरावट आई लेकिन कमाई में काफी तेजी आई। रुपये के हिसाब से देखें तो सालाना आधार पर भारत की कमाई लगभग 50% बढ़कर 2.59 लाख करोड़ रुपये रही। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भारी उछाल और रुपये की कमजोरी के कारण यह बढ़ोतरी दर्ज की गई।

भारत मुख्य रूप से डीजल, पेट्रोल, जेट फ्यूल, नेफ्था और फ्यूल ऑयल का निर्यात करता है। कुल पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में डीजल की हिस्सेदारी 42% और पेट्रोल की 23% है। भारत के कुल ईंधन निर्यात में रिलायंस इंडस्ट्रीज की हिस्सेदारी लगभग 70% है। इसके अलावा रूस की रोसनेफ्ट के निवेश वाली कंपनी नायरा एनर्जी, सरकारी कंपनी MRPL और अन्य रिफाइनरियां भी एक्सपोर्ट करती हैं।

क्यों बढ़ी कीमत?

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार डॉलर के हिसाब से भारत की कमाई में पिछले साल के मुकाबले लगभग 40% की वृद्धि हुई। सितंबर तक के छह महीनों में डीजल और पेट्रोल की औसत क्षेत्रीय बेंचमार्क कीमतों में क्रमशः 83% और 54% की तेजी आई। रुपये की कमजोरी ने इस कमाई को और बढ़ा दिया। अप्रैल-सितंबर में डॉलर के मुकाबले रुपये का एवरेज एक्सचेंज रेट 95.17 रहा, जबकि एक साल पहले यह 86.44 था।

इस दौरान डॉलर के मुकाबले रुपये में लगभग नौ रुपये की गिरावट आई। ईरान युद्ध के कारण पिछले छह महीनों में कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ी हैं। अभी बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रहा है। रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों और आपूर्ति-मांग की टाइट स्थिति के कारण डीजल की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा, जिससे कुछ महीनों में कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं।

पेट्रोल-डीजल की कीमत

डीजल की औसत क्षेत्रीय बेंचमार्क कीमत 151 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। भारत की कमाई में बढ़ोतरी में एक बड़ा हिस्सा डीजल से आया। निर्यात की मात्रा में 19% की गिरावट के बावजूद डीजल के निर्यात से होने वाली कमाई रुपये के हिसाब से 58% बढ़कर लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये हो गई। डॉलर के हिसाब से इसमें 48% की वृद्धि हुई।

पेट्रोल की औसत क्षेत्रीय बेंचमार्क कीमत बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल हो गई। पेट्रोल के निर्यात से होने वाली कमाई रुपये के हिसाब से 21% बढ़कर 58,000 करोड़ रुपये हो गई, जबकि डॉलर के हिसाब से इसमें 13% की वृद्धि हुई। इस दौरान देश का पेट्रोल निर्यात में 24% की गिरावट आई। रुपये के हिसाब से भारत की पेट्रोलियम निर्यात कमाई में डीजल और पेट्रोल का संयुक्त योगदान लगभग 70% रहा।

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