UNGA में भारत के दोस्त ने तुर्की को दिया करारा जवाब, एर्दोगन के भाषण को बताया पाखंड, UN चार्टर लागू करने की चुनौती
Updated on
24-09-2026
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से भारत के दोस्त ने साइप्रस ने तुर्की को करारा जवाब दिया है। तुर्की के राष्ट्रपति ने निकोस क्रिस्टोलाइट्स ने महासभा को संबोधित करते हुए तुर्की के पाखंड की पोल खोल दी। क्रिस्टोडौलाइड्स ने उत्तरी साइप्रस पर तुर्की के लगातार कब्जे की निंदा की। उन्होंने कहा कि तुर्की दुनिया को कब्जे और क्षेत्रीय अखंडता पर उपदेश देता है जबकि तुर्की की सेनाएं उत्तरी साइप्रस में कब्जा करके बैठी हुई हैं।क्रिस्टोडौलाइड्स इसी महासभा में एक दिन पहले दिए गए तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन के भाषण का जवाब दे रहे थे। एर्दोगन ने तुर्की के कब्जे वाले साइप्रस के इलाकों में मौजूद गैर-कानूनी सत्ता की अलग संप्रभुता को मान्यता देने की मांग की थी। एर्दोगन ने फिलिस्तीनियों के मुद्दे का जिक्र करते हुए सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की भी बात कही थी।एर्दोगन के पाखंड की खोली पोल
क्रिस्टोडौलाइट्स ने कहा, "मैंने कल राष्ट्रपति एर्दोगन का भाषण बहुत ध्यान से सुना। अंतरराष्ट्रीय कानून का जिक्र, सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान, गैर-कानूनी कब्जा और शरणार्थियों की हालत पर चिंता। लेकिन जब साइप्रस की बात आती है तो तुर्की ठीक इसके उलट काम करता है। यह बहुत ज्यादा पाखंड है।"
UN चार्टर लागू करने की मांग
साइप्रस के राष्ट्रपति ने आगे कहा, "एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर का भी काफी जिक्र किया, लेकिन राजनेताओं को उनके शब्दों से नहीं, उनके कामों से आंका जाता है।" क्रिस्टोडौलाइड्स ने कहा, "मिस्टर एर्दोगन, अगर आप चार्टर का हवाला देना चाहते हैं, तो आपको पहले उसे लागू करना होगा।"
उन्होंने एर्दोगन को याद दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने साइप्रस की समस्या को सुलझाने के लिए एक ढांचा तैयार किया है। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस ढांचे के तहत व्यापक समाधान तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध हैं और बातचीत को फिर वहीं से शुरू करने के लिए तैयार हैं, जहां 2017 में इसे छोड़ा गया था।
साइप्रस का बंटवारा स्वीकार नहीं
साइप्रस के राष्ट्रपति ने दोहराया कि वे समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं लेकिन यह भी कहा कि देश का बंटवारा स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा, यह मेरे देश और मेरे लोगों का भविष्य नहीं हो सकता और न होगा। कभी नहीं, हमारे द्वीप को फिर से एकजुट करने का हमारा संकल्प अटूट है। साइप्रस मुद्दे पर अपनी बात खत्म करते हुए क्रिस्टोडौलाइड्स ने कहा, "मैं राष्ट्रपति एर्दोगन से आह्वान करता हूं कि वे संयुक्त राष्ट्र से सहमत ढांचे के भीतर सार्थक बातचीत की अनुमति दें।"
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