लिक्विड फंड्स में निवेश 7 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा, सुरक्षित विकल्पों की तरफ क्यों भाग रहे हैं निवेशक?
Updated on
19-05-2026
नई दिल्ली: शेयर बाजार में जारी अस्थिरता और वैश्विक तनाव के बीच निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इसी का असर है कि अप्रैल 2026 में लिक्विड फंड्स (कम समय के लिए पैसा रखने वाले म्यूचुअल फंड) में निवेश 7 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। AMFI के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में लिक्विड फंड्स में शुद्ध निवेश 1.65 लाख करोड़ रुपये रहा। पिछले साल इसी महीने यह आंकड़ा 1.19 लाख करोड़ था। सालाना आधार पर इसमें 46,448 करोड़ की बढ़ोतरी दर्ज हुई, जो पिछले कम से कम 7 वर्षों में सबसे ज्यादा है।
बढ़ी नकदी का असर
विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके पीछे बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी नकदी बड़ी वजह रही। अप्रैल के दौरान बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी 2 लाख करोड़ से 5.5 लाख करोड़ के बीच रही जबकि पिछले साल यह 1 लाख करोड़ से 2 लाख करोड़ थी। RBI के कदमों से बाजार में पर्याप्त नकदी बनी रही, जिससे बैंकों और कंपनियों ने अतिरिक्त पैसा लिक्विड फंड्स में लगाया।
बेहतर रिटर्न
ET की रिपोर्ट के अनुसार, कम अवधि की ब्याज दरों ने भी निवेशकों को आकर्षित किया। CD यानी Certificates of Deposit की दरें 6.5% से 7.5% के बीच रहीं। अप्रैल में लिक्विड फंड्स ने लगभग 5.5-6% का रिटर्न दिया, जबकि ओवरनाइट रेट लगभग 5% थे, जिससे 50-100 बेसिस पॉइंट्स का यील्ड एडवांटेज मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव और शेयर बाजार की अस्थिरता के कारण निवेशक फिलहाल जोखिम कम रखना चाहते हैं।
क्या होता है लिक्विड फंड?
लिक्विड फंड्स डेट म्यूचुअल फंड्स होते हैं। ये आपका पैसा ट्रेजरी बिल्स, गवर्नमेंट सिक्योरिटीज और कॉल मनी जैसे बहुत शॉर्ट टर्म वाले मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं। ये फंड्स 91 दिनों के मैच्योरिटी पीरियड वाले इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश कर सकते हैं। लिक्विड फंड्स का इस्तेमाल निवेशक आमतौर पर एक से तीन महीने की अवधि के लिए करते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपके बच्चे की स्कूल फीस का इंस्टॉलमेंट दो महीने बाद हो या आप दो महीने बाद हॉलिडे पर जाने वाले हों, तो उसके लिए तय पैसा आप लिक्विड फंड में निवेश कर सकते हैं।