इजरायल तैयार कर रहा रोबोटिक कीड़ों की फौज, कॉकरोच ड्रोन कैसे उड़ाएंगे दुश्मनों की होश?
Updated on
20-09-2026
तेल अवीव: भविष्य में लड़ी जाने वाली लड़ाइयों में जीत उसी की होगी जो टेक्नोलॉजी का अत्यधिक इस्तेमाल करे। शायद फायटर जेट या भारी भरकम हथियार जंग का रूख ना बदलें और छोटे छोटे हथियार दुश्मन के खेमे में तबाही मचा दे। नये युद्ध की शुरूआत ऐसी छोटी मशीनों से हो सकती है जो देखने में कीड़ों जैसी लगती हैं। इजरायल की बायो-इंस्पायर्ड रोबोटिक्स, माइक्रो-ड्रोन, ऑटोनॉमस सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बढ़ती दिलचस्पी एक ऐसे युद्धक्षेत्र की ओर इशारा करती है जहां जानकारी जुटाने का काम सिर्फ ऊपर उड़ने वाले विमानों तक ही सीमित नहीं रहेगा।भविष्य के मिलिट्री ऑपरेशन में ऐसी छोटी मशीनें शामिल हो सकती हैं जो तंग जगहों से उड़ सकती हैं, मलबे पर रेंग सकती हैं, सुरंगों में जा सकती हैं और ऐसी जगहों पर काम कर सकती हैं जहां आम मशीनें नहीं पहुंच सकतीं।'कॉकरोच ड्रोन' का आइडिया भले ही काल्पनिक लगे लेकिन कॉकरोच जैसे रोबोट पर सैन्य रिसर्च शुरू हो चुका है। ये रिसर्च मिलिट्री रिसर्च के एक बहुत बड़े इकोसिस्टम का हिस्सा है जिसमें इजराइल का रक्षा मंत्रालय, अमेरिकी यूनिवर्सिटीज और रक्षा-तकनीक संस्थान शामिल हैं।
इजरायल कर रहा है कॉकरोच ड्रोन बनाने की कोशिश
2009 से अब तक इजरायली रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर कम से कम 30 अमेरिकी विश्वविद्यालयों के साथ कम से कम 70 रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया गया है। इन प्रोजेक्ट्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन झुंड जैसी चीजें शामिल हैं। मिसाइल गाइडेंस, क्वांटम सेंसिंग, ऑटोनॉमस सिस्टम और बायो-इंस्पायर्ड रोबोटिक्स। सबसे दिलचस्प क्षेत्रों में से एक है कीड़ों से प्रेरित रोबोटिक सिस्टम का विकास। कॉकरोच का आकर्षण उसके रूप-रंग में नहीं बल्कि उसकी बायोलॉजी में है। कॉकरोच बहुत तंग जगहों से निकल सकते हैं, ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चल सकते हैं और ऐसे माहौल में भी काम करते रह सकते हैं जो पारंपरिक रोबोटिक सिस्टम के लिए मुश्किल साबित हो सकते हैं।
इजरायल कर रहा है 'माइक्रो-ड्रोन स्वार्म' पर काम
यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के रिसर्चर्स ने इजरायली रक्षा मंत्रालय के एक वैज्ञानिक के साथ मिलकर इंचवर्म यानि एक तरह का कीड़ा से प्रेरित रेंगने वाले रोबोट पर भी काम किया है। इनके इस्तेमाल के कई और तरीके हो सकते हैं जो सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं हैं। ऐसे रोबोट का इस्तेमाल जासूसी, आपदा के समय मदद, खोज और बचाव, सुरंगों की जांच और गिरी हुई इमारतों के निरीक्षण के लिए किया जा सकता है।
लेकिन शहरी इलाकों में होने वाली लड़ाई में इनकी सैन्य अहमियत बहुत बढ़ जाएगी क्योंकि वहां इमारतें, जमीन के नीचे बने रास्ते, गुफाएं और मलबे ऐसे हालात पैदा करते हैं जिनमें आम गाड़ियां और बड़े ड्रोन ज्यादा काम नहीं आते। इजरायल के लिए ये अहम इसलिए भी होंगे क्योंकि हमास ने गाजा में सुरंगों का जो नेटवर्क तैयार कर रखा है उसे भेदना अत्यंत मुश्किल है।
इजरायल के कॉकरोच ड्रोन युद्ध का मैदान बदल देंगे?
यानि असली इनोवेशन ऐसा रोबोट नहीं है जो कॉकरोच जैसा दिखता हो। बल्कि यह युद्ध की एक नई सोच है जिसमें छोटा आकार, ऑटोनॉमी, नेटवर्किंग, कम लागत और संख्या उतनी ही जरूरी हो जाती है जितनी रफ्तार, रेंज और पेलोड। पारंपरिक ड्रोन ने युद्ध का तरीका बदल दिया था इसने सेनाओं को दुश्मन के इलाके के ऊपर सीधे पायलट भेजे बिना निगरानी करने और हमला करने की क्षमता दी है। माइक्रो-ड्रोन इस बदलाव को ऐसी जगहों तक ले जा सकते हैं जहाँ पारंपरिक ड्रोन काम नहीं कर सकते।
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