मकर संक्रांति पर अनेक प्रकार के आयोजन देश में और प्रदेश में किए जाते हैं। पहले का जहां तक ध्यान है, उस दिन गिल्ली डंडा खेलने का एक प्रचलन था। वह शायद क्रिकेट के कारण विलुप्त हो गया है । एक और प्रचलन है - पतंग उड़ाने का। कहा जाता है कि पतंग उड़ाने का अपना एक अलग ही मजा है । लेकिन साथ ही उसमें एक प्रतिस्पर्धा की भावना आ गई है, कि पतंग उड़ाने वाला दूसरे की उड़ती हुई पतंग को काटने का प्रयास करता है, और इस प्रयास में वह तभी सफल हो सकता है, जब उसका मांझा याने डोर सामने वाले से अधिक मजबूत हो और वह डोर आजकल हमने देखा है, कि चीन से आयातित जो मांझा है, वह लोग ज्यादा पसंद करते हैं । ताकि दूसरे की पतंग को काटा जा सके। लेकिन यह मांझा जब हिंसक हो जाता है, जब वह किसी का गला काट देता है । पतंग उड़ाते समय यह मांझा यदि किसी के गले पर सरक गया तो समझो उसकी जिंदगी या तो खत्म हो जाएगी, या उसे काफी परेशानी के बाद वापस जिंदा रहने का अवसर मिल पाएगा । यह हाल ही के वर्ष में पतंगबाजी करने पर निष्कर्ष निकला है । पतंगबाजी की शुरुआत इस वर्ष प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने पुरानी विधानसभा परिसर से की थी, इसी के चलते लोगों में ज्यादा उत्साह का माहौल बना और एक दूसरे की पतंग काटने के चक्कर में लोगों ने चीन से आने वाले मांझे का प्रयोग किया । इसके कई दुष्परिणाम सामने आए ।
बता दें कि 14 जनवरी को दिन में चाइनीज मांझे से एक अन्य बच्चा व बुजुर्ग भी गंभीर घायल हुए हैं। वहीं शाम को ये हादसा हो गया।
इन हादसों के बाद सवाल यह उठाए जा रहे हैं, कि प्रतिबंध के बाद भी चाइना डोर का प्रयोग लगातार जारी है। पतंगबाजी के उत्साह में चाइना डोर जानलेवा बनती जा रही है। चाइनीस मांझे के प्रतिबंध और उस पर रोक लगाने की प्रशासन की तमाम कोशिश धरी रह गई। एक के बाद एक हादसे सामने आते जा रहे हैं।
अक्सर देखा गया है कि पतंगबाजी का शौक रखने वाले लोग ज्यादा से ज्यादा दूसरे लोगों की पतंग काट पाएं, इसके लिए वे चाइनीज मांझे से पतंग उड़ाते है। कभी-कभी ये चाइनीज मांझा पशु-पक्षियों और ना जाने कितने मासूमों की जान ले लेता है।
क्या मध्यप्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री इस विषय में कोई गंभीर कदम उठते हैं, अथवा नहीं ? यह देखने का विषय है । क्योंकि किसी की गलती पर या तो उसका मकान बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया जाता है। या यदि कोई अधिकारी गलत काम करें, तो उसका स्थानांतरण अथवा उसे लाइन अटैच कर दिया जाता है । लेकिन इस प्रकार की जानलेवा गतिविधियों में जो लिप्त हैं, उन पर क्या कार्रवाई होती है ? यह अब देखने का विषय है । मुख्यमंत्री जी इस पर किस प्रकार से संज्ञान लेते हैं यह भी प्रदेश की जनता देखने का इंतजार कर रही ह|
(लेखक वरिष्ठ लेखक, पत्रकार पूर्व अधिकारी हैं)