ईरान के रक्षा मंत्री बने मेहरदाद अखलाघी, मिसाइल और रक्षा तकनीक के एक्सपर्ट, अमेरिका ने लगा रखा है बैन

Updated on 19-10-2026
तेहरान: मेहरदाद अखलाघी केताबची को ईरान का रक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है। 68 वर्षीय अखलाघी की नियुक्ति को रविवार को देश की संसद से मंजूरी मिली है। कुल 237 सांसदों ने उनके पक्ष में वोट दिया, जबकि 15 ने मेहरदाद के खिलाफ मतदान किया। यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब अमेरिका के ईरान पर नए सिरे से हमले करने की आशंका तेज हो रही है। अखलाघी ने पद संभालते ही तेवर दिखाते हुए अमेरिका को किसी भी हमले के खिलाफ यूएस आर्मी के बेसों पर जबरदस्त जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरानी नेताओं को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए थे। इन हमलों में सर्वोच्च नेता अली खमेनेई समेत ईरान के कई वरिष्ठ राजनेता और सैन्य अफसर मारे गए थे। इनमें पूर्व रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह भी शामिल थे। नासिरजाहेद की मौत के बाद माजिद इब्न-ए-रेजा को डिफेंस मिनिस्टर बनाया गया था। अब अखलाघी की नियुक्त के बाद माजिद उनके डिप्टी होंगे।
हमने पूरी तैयारी कर ली है और हम बिना किसी चिंता के अपना काम जारी रखे हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति अगर वह एक भी बम गिराते हैं तो उन्हें यह देखना होगा कि उनके कितने सैनिकों को वापस ले जाने के लिए स्ट्रेचर की जरूरत पड़ेगी।
मेहरदाद अखलाघी

अखलाघी पर बड़ी जिम्मेदारी

अखलाघी पर ईरान के सैन्य-औद्योगिक बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण और विस्तार की जिम्मेदारी होगी, जिसे अमेरिका और इजरायल ने अपने हमलों में बुरी तरह निशाना बनाया है। मेहरदाद की रक्षा योजनाओं को वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग ने पहले ही मंजूरी दे दी थी।
राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने कहा है कि मेहरदाद अखलाघी के पास रक्षा मंत्रालय और उससे जुड़े संगठनों में काम करने का 42 साल से अधिक का अनुभव है। ईरानी मीडिया में आई रिपोर्ट के अनुसार, नए डिफेंस मिनिस्टर को बैलिस्टिक मिसाइलों, सॉलिड-फ्यूल प्रोपल्शन, एयरोस्पेस तकनीक और सैन्य-औद्योगिक उत्पादन में विशेष महारत हासिल है।

अमेरिका ने लगा रखा है बैन

मेहरदाद अखलाघी केताबची शाहिद बघेरी इंडस्ट्रियल ग्रुप, एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ऑर्गनाइजेशन और डिफेंस इंडस्ट्रीज ऑर्गनाइजेशन के हेड रह चुके हैं। अखलाघी और इन सभी संगठनों पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखे हैं। उन पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध भी लागू हैं। ऐसे में उनकी नियुक्ति अमेरिका को नागवार गुजर सकती है।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े समाचार पत्र तस्नीम के अनुसार, अखलाघी कई दशकों से अलग-अलग तरह की मिसाइलों को विकसित करने वाली परियोजनाओं से जुड़े रहे हैं। अखलाघी ने ईरान की सेज्जील और जोलफाघार बैलिस्टिक मिसाइल, अलमास मिसाइल और यासीन गाइडेड बमों को तैयार करने में भूमिका निभाई है।


मेहरदाद अखलाघी बेहद अहम हैं क्योंकि ईरान को अपने रणनीतिक हथियारों- खासकर मिसाइलों और ड्रोनों की संख्या और गुणवत्ता बढ़ाने की जरूरत है।
जनरल रजा तलाई-निक

ईरान को दिए हैं कई हथियार

अखलाघी को स्पेस लॉन्चर, रिसर्च रॉकेट और सेमनान स्थित 'इमाम खुमैनी स्पेस सेंटर' से जुड़े बुनियादी ढांचे में भी विशेषज्ञता हासिल है। ये सभी ईरान के इजरायल और अमेरिका के खिलाफ युद्धों में अहम तत्व रहे हैं।

अखलाघी ने इस महीने संसद सदस्यों को बताया कि उन्होंने वरिष्ठ सैन्य कमांडरों से मुलाकात की है। इनमें IRGC के कमांडर-इन-चीफ जनरल अहमद वाहिदी भी हैं। इसका मकसद युद्ध के की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझना था।

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