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31 मार्च 2026 तक 310 करोड़ आए। पूरी वसूली नहीं कर पाए इसलिए फैसला लिया कि मार्च नहीं अब 30 अप्रैल तक वसूली की जाएगी। एक महीने में 34 करोड़ की वसूली का टारगेट तय किया। लेकिन इसमें भी पिछड़ गए। केवल 20 करोड़ ही वसूल हुए। आखिरी में कुल कलेक्शन 330 करोड़ तक ही पहुंचा। संपत्ति कर की वसूली में हर साल पिछड़ने का सीधा असर निगम के विकास कामों पर पड़ रहा है।
दैनिक भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि निगम को इस साल 400 करोड़ से ज्यादा संपत्ति कर मिल सकता था। लेकिन बड़े बकायादारों से संपत्ति कर की वसूली ही नहीं हो पाई। निगम में केवल 200 से 250 लोगों से ही 100 करोड़ की वसूली करना है। इन पर संपत्ति कर करीब तीन साल से बकाया है।
5000 खाली प्लॉट पर 25 करोड़ का टैक्स
करीब एक साल की मेहनत के बाद नगर निगम ने सभी 10 जोन में करीब 5000 खाली प्लॉट की सूची बनाई, जिससे टैक्स वसूल करना था। इन सभी से करीब 25 करोड़ बकाया संपत्ति कर लेना था। लेकिन निगम वाले इनसे भी टैक्स नहीं ले पाए। इसमें बड़ी संख्या में बिल्डर और उद्योगपति हैं जिनके पास बड़े साइज में खाली प्लॉट हैं। निगम वालों ने इन्हें डिमांड नोट भी भेजा, लेकिन उन्होंने दिया ही नहीं। निगम वालों ने सख्ती भी नहीं की। इस वजह से खाली प्लॉट से पिछले वित्तीय साल में 5 करोड़ के आसपास की ही वसूली हो पाई। अब निगम वाले फिर कह रहे हैं कि इस साल सख्ती से वसूली कर ली जाएगी।
रायपुर के ये हैं बड़े बकाए वाले जोन, जहां अभी तक नहीं हो पाई वसूली