'आवश्यकता आविष्कार की जननी', डिमांड-सप्‍लाई का गैप पकड़ लगाया दांव, 3 साल में बनाई 3 करोड़ की कंपनी

Updated on 03-10-2026
नई दिल्‍ली: यह कहानी है मोहिता गुप्ता इंद्रायण की। वह दिल्‍ली से हैं। उन्‍होंने डिमांड और सप्‍लाई के गैप को पहचानकर एक सफल फैशन ब्रांड खड़ा कर दिया है। इसका नाम 'स्प्रिंग सोल' (Spring Soul) है। साल 2023 में इसकी शुरुआत हुई थी। मोहिता ने इस गैप को तब महसूस किया जब उन्‍होंने देखा कि जहां एक ओर रेडीमेड कपड़ों में मनपसंद फिटिंग पाना मुश्किल होता है। वहीं दूसरी ओर लोकल बुटीक या डिजाइनर्स के पास जाने पर जेब ढीली करनी पड़ती है। यह ब्रांड पारंपरिक भारतीय कपड़ों और जीरो वेस्‍ट की मिसाल बनकर 3 करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर के आंकड़े को पार कर चुका है। आइए, यहां मोहिता गुप्ता इंद्रायण की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।

मोहिता दिल्ली में जन्मीं और देश-विदेश के अलग-अलग हिस्सों में पली-बढ़ीं। कपड़ों और भारतीय विरासत से उनका पुराना नाता रहा है। लेडी श्री राम कॉलेज से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने NIFT दिल्ली से अपैरल मार्केटिंग और मर्चेंडाइजिंग की पढ़ाई की। शादी के बाद उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर साल 2010 में बच्चों के कपड़ों का ब्रांड '612 लीग' शुरू किया। यह बड़ा किड्सवियर ब्रांड बनकर उभरा। हालांकि, कोरोना महामारी के दौरान फिजिकल स्टोर आधारित यह बिजनेस बंद करना पड़ा। लेकिन, मोहिता के भीतर फैशन और भारतीय विरासत से जुड़ा कुछ नया करने की ललक कायम रही।

'612 लीग' के बाद मोहिता ने बाजार का गहराई से अध्ययन किया। पाया कि 5,000 से 15,000 रुपये के बीच के 'मास-प्रीमियम' सेगमेंट में बड़ा खालीपन है। ग्राहकों के पास या तो रेडी-टू-वियर के रूप में सीमित ऑप्‍शन थे या फिर अनिश्चित क्‍वालिटी वाले लोकल बुटीक। इस समस्या का समाधान निकालते हुए उन्होंने 2023 में गुरुग्राम से 'स्प्रिंग सोल' की शुरुआत की। इसका मकसद महिलाओं को बिना डिजाइनर कीमतों के उनकी पसंद के कट, डिजाइन और साइज के अनुसार कस्टमाइज्ड और सुविधाजनक कपड़े उपलब्ध कराना था।

बिजनेस के शुरुआती दिनों में गुरुग्राम के यूनिट में दो दिन की बिजली कटौती के वक्‍त जब उत्पादन रुका और छह कारीगरों को खाली बैठा देखना पड़ा तब 'आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है' वाली कहावत सच साबित हुई। मोहिता ने अपने कारीगरों से बचे हुए कपड़ों के टुकड़ों (कतरन) से तुर्की स्टाइल की फैब्रिक ज्वेलरी बनवाई। इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते ही ये पीस रातोंरात बिक गए। इससे ब्रांड का ग्रॉस मार्जिन 15% तक बढ़ गया। इसी घटना से प्रेरित होकर ब्रांड ने 'जीरो-वेस्ट डिजाइन पॉलिसी' अपनाई। इसके तहत कपड़े के हर कतरन को या तो ज्वेलरी या फिर पैकेजिंग सामग्री में बदल दिया जाता है।

शुरुआत में मोहिता व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम के जरिए अपने पहले 100 ग्राहकों तक पहुंचीं। जल्द ही उन्‍होंने मिंत्रा, नायका फैशन, टाटा क्लिक लग्जरी और अपनी खुद की वेबसाइट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का सहारा लिया। आज यह ब्रांड हर महीने लगभग 25 लाख रुपये (करीब 3 करोड़ रुपये सालाना) का रेवेन्‍यू हासिल कर रहा है। वर्तमान में गुरुग्राम में एक एक्सपेरिमेंटल स्टूडियो चलाने वाली मोहिता वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंत तक 5 करोड़ रुपये का रेवेन्‍यू पार करने और अगले पांच सालों में 100 करोड़ रुपये के मुकाम को छूने का टारगेट लेकर आगे बढ़ रही हैं।


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