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कोचिंग संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर की पेपर लीक नेटवर्क से पुरानी सांठगांठ भी सामने आई है। उसकी नेटवर्थ ₹1500 करोड़ बताई जा रही है
भास्कर ने इस कोचिंग से NEET 2025 में सफल छात्रों की पड़ताल की। इसमें 19 छात्रों का AIIMS में सिलेक्शन मिला।
2 छात्रों का AIIMS दिल्ली, 5 का हैदराबाद और 3-3 का भोपाल व वाराणसी AIIMS में सिलेक्शन हुआ। नागपुर, देवघर, गोरखपुर, राजकोट, रायपुर और मंगलगिरी AIIMS में भी एक-एक छात्र पहुंचे।
मोटेगांवकर अमीर और पढ़ाई में बेहतर छात्रों को टारगेट करता था
सूत्रों के मुताबिक मोटेगांवकर ऐसे छात्रों को निशाना बनाता था, जो आर्थिक रूप से मजबूत हों और पढ़ाई में औसत से बेहतर हों। परिजनों से डील के बाद इन्हें रेगुलर बैच में शामिल किया जाता था।
परीक्षा से पहले आखिरी 15 दिनों में ‘वन-ऑन-वन मेंटरिंग कोर्स’ चलता था। पेपर मिलते ही इन छात्रों को सवाल-जवाब रटवाए जाते थे। CBI को इससे जुड़े कई वीडियो भी मिले हैं।
CBI के मुताबिक मोटेगांवकर कई साल से पुणे की ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे के जरिए प्रो. पीवी कुलकर्णी और मनीषा मांढरे के संपर्क में था।
नेटवर्क में शामिल गुरुग्राम के यश यादव ने जयपुर के विकास बिवाल को NEET पेपर बेचा था। उसे पेपर नासिक के शुभम खैरनार से मिला था।
15 लाख रुपए में पेपर बेचने का शक
CBI ने 19 मई को नागपुर के सेंट्रल एवेन्यू और इतवारी इलाके में दो छात्रों के घर छापे मारे। यहां से मोबाइल फोन, लैपटॉप, हस्तलिखित नोट्स और दूसरे डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं। दोनों ने इस साल NEET एग्जाम दिया था।
CBI को शक है कि पुणे नेटवर्क के जरिए 15 लाख रुपए प्रति छात्र के हिसाब से लीक पेपर बेचा गया। एजेंसी को दोनों छात्रों के मनीषा वाघमारे और केमिस्ट्री लेक्चरर पीवी कुलकर्णी से संपर्क के संकेत मिले हैं।
री-एग्जाम को फुलप्रूफ बनाने के निर्देश
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को NEET री-एग्जाम की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि 21 जून की परीक्षा सुरक्षित, निर्बाध और पूरी तरह फुलप्रूफ तरीके से कराई जाए।
उन्होंने कहा कि पिछली परीक्षा प्रक्रिया में जो भी खामियां सामने आईं, उन्हें पूरी तरह खत्म किया जाए।