'Buy Buy' से 'Bye Bye' तक पहुंचा निफ्टी! 15 साल के सबसे खराब रिकॉर्ड की ओर, जानें गिरावट के 3 बड़े कारण

Updated on 29-09-2026
नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार का प्रमुख इंडेक्स निफ्टी साल 2026 में अब तक 13% से ज्यादा गिर चुका है। अगर साल के आखिरी तीन महीनों में यह गिरावट बनी रहती है, तो Nifty के लिए यह साल 2011 के बाद 15 साल का सबसे खराब कैलेंडर ईयर हो सकता है। साल 2011 में निफ्टी 50 करीब 25% टूट गया था।

यह स्थिति उस बाजार के लिए बड़ा बदलाव है, जो कुछ समय पहले तक दुनिया के सबसे महंगे इक्विटी बाजारों में शामिल था और वैश्विक झटकों के बावजूद मजबूत बना हुआ था। आज मंगलवार को भी निफ्टी में गिरावट बनी हुई है। सुबह 11:30 बजे निफ्टी करीब 50 अंकों की गिरावट के साथ 22,731.50 अंक पर कारोबार कर रहा था। ऐसे में शेयर बाजार के निवेशकों को बड़ा नुकसान हो चुका है।

बाजार में गिरावट के 3 बड़े कारण

बाजार के गिरावट के 3 प्रमुख कारण सामने आए हैं। इनमें कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में मजबूती शामिल हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण इस साल की शुरुआत में क्रूड महंगा हुआ। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगे कच्चे तेल से महंगाई, चालू खाते, कंपनियों के मार्जिन और रुपये पर दबाव बढ़ता है। इससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंता फिर बढ़ी है।

पहले तीन महीनों में सबसे ज्यादा नुकसान

निफ्टी में सबसे बड़ी गिरावट 2026 की पहली तिमाही में देखने को मिली। इस दौरान इंडेक्स करीब 15% तक गिर गया था। इसके बाद अप्रैल-जून तिमाही में बाजार ने करीब 7% की रिकवरी की, लेकिन जुलाई-सितंबर तिमाही में फिर करीब 5% की गिरावट दर्ज हुई।

इस कमजोरी का असर सिर्फ 2026 तक सीमित नहीं है। सितंबर 2024 के अंत से अब तक निफ्टी करीब 12% नीचे है। हालांकि, व्यापक बाजार के कुछ हिस्सों ने बेहतर प्रदर्शन किया है और निफ्टी मिडकैप व स्मॉलकैप इंडेक्स इस साल अब तक बढ़त में हैं।

विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली

  • बाजार पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली का रहा है।
  • 2026 में अगस्त तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से रिकॉर्ड 24.6 अरब डॉलर निकाल चुके थे। हालांकि अगस्त में वे फिर खरीदार बने थे।
  • विदेशी पूंजी का एक हिस्सा ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे AI और सेमीकंडक्टर केंद्रित बाजारों की ओर गया, जहां टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर शेयरों में मजबूत तेजी देखने को मिली।
  • विश्लेषकों के मुताबिक, भारत में AI से सीधे लाभ पाने वाली कंपनियों का प्रतिनिधित्व सीमित होने के कारण भारतीय बाजार को इस वैश्विक निवेश थीम का उतना फायदा नहीं मिला।
  • सितंबर में भी विदेशी बिकवाली जारी रही। महीने के पहले पखवाड़े में FPI ने भारतीय शेयरों से 13,138 करोड़ रुपये निकाले।
  • सितंबर के मध्य तक 2026 में विदेशी बिकवाली का कुल आंकड़ा करीब 2.37 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया था।

24 महीने में 56 अरब डॉलर की निकासी

मोतीलाल ओसवाल के अनुमान के मुताबिक, पिछले 24 महीनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब 56 अरब डॉलर निकाले हैं। यह राशि इससे पहले के आठ वर्षों में आए कुल FII निवेश के बराबर बताई गई है।
हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने इस दबाव को काफी हद तक संभाला है। इसी अवधि में घरेलू संस्थानों ने करीब 177 अरब डॉलर का निवेश किया। इसमें हर महीने 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के म्यूचुअल फंड SIP फ्लो का भी योगदान रहा।

आगे किन चीजों पर रहेगी नजर?

2026 की आखिरी तिमाही में निफ्टी के सामने एक साथ कई फैक्टर हैं। अर्निंग ग्रोथ और घरेलू निवेश बाजार को सहारा दे रहे हैं, लेकिन विदेशी निवेशकों की वापसी अभी निर्णायक नहीं हुई है। दूसरी ओर, महंगा कच्चा तेल, कमजोर रुपया, महंगाई और ब्याज दरों का रुख आने वाले महीनों में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे।

Buy Buy से Bye Bye तक

निफ्टी की गिरावट को देखकर लोगों ने भी सोशल मीडिया पर मजे ले लिए हैं। Sumit Mehrotra ने एक्स पर लिखा:

Nifty: Buy, Buy Buy से Bye Bye Bye तक का सफर। हाल में मशहूर कारोबारी हर्ष गोयनका ने भी एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया था। इसमें एक बंदर एक झूले पर ऊपर चढ़ता है और फिर फिसलकर नीचे आ जाता है। उन्होंने बंदर के इस एक्शन को निफ्टी की स्थिति से जोड़ा था।

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