इशाक डार ने गीदड़भभकी दी
मंत्री ने कहा कि साझा जल-संसाधन ''सहयोग, बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान के आधार पर देशों के बीच एक सेतु बने रहने चाहिए, ताकि वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों का भला हो सके।'' उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान को ''सही तौर पर आवंटित'' पानी से वंचित करने की किसी भी कोशिश के क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर ''गंभीर परिणाम'' होंगे।
सिंधु जल संधि क्या है?
सिंधु जल संधि पर 19 सितंबर 1960 को हस्ताक्षर किए गए थे। सीमा-पार बहने वाली नदियों से जुड़े मुद्दों के समाधान और प्रबंधन के उद्देश्य से यह समझौता नौ वर्षों की लंबी वार्ताओं के बाद अस्तित्व में आया था। इसके तहत पूर्व की तीन नदियों रावी, ब्यास, और सतलज के पानी पर भारत को पूर्ण अधिकार मिला था। वहीं, पश्चिमी नदियों सिंधु, चिनाब, और झेलम के पानी का 80 प्रतिशत अधिकार पाकिस्तान को मिला।