चीन की बैसाखी से अंतरिक्ष में उड़ेंगे पाकिस्तानी एस्ट्रोनॉट, सिर्फ एक हफ्ते बाद भेज दिए जाएंगे वापस, कैसा अहसान?
Updated on
28-09-2026
बीजिंग/इस्लामाबाद: चीन पाकिस्तान के एस्ट्रोनॉट को अंतरिक्ष में भेजने जा रहा है। ऐसा पहली बार होगा जब पाकिस्तान के एस्ट्रोनॉट अंतरिक्ष की सैर करने वाले हैं। अपनी 'स्पेस डिप्लोमेसी' का दायरा बढ़ाते हुए चीन अब एक पाकिस्तानी एस्ट्रोनॉट को ऑर्बिट में ले जाने की तैयारी कर रहा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब भारत अपने स्वदेशी 'गगनयान' मिशन के जरिए खुद के दम पर अंतरिक्ष में इतिहास रचने के बेहद करीब है।एक तरफ भारत की आत्मनिर्भर उड़ान है तो दूसरी तरफ कंगाली से जूझ रहे पाकिस्तान का ड्रैगन की बैसाखी पर बैठकर अपने अंतरिक्ष मिशन के लिए निकलने वाला है। इस मिशन के लिए पाकिस्तान के दो पायलट चीन में रह रहे हैं और मैंडरिन भाषा सीख रहे हैं। वो सेंट्रीफ्यूज ड्रिल में घूम रहे हैं और भारहीनता की स्थिति में खाना-पीना, सोना और उपकरणों की मरम्मत करना सीख रहे हैं। यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि जल्द ही यह तय होने वाला है कि उनमें से कौन चीन के तियांगोंग स्पेस स्टेशन पर जाने वाला पहला विदेशी अंतरिक्ष यात्री बनेगा।क्या खुद के दम पर अंतरिक्ष में नहीं जा सकता पाकिस्तान?
- नहीं पाकिस्तानी अंतरिक्ष एजेंसी SUPARCO के पास वो क्षमता नहीं है कि वो अपने पायलट को अंतरिक्ष भेज सके। पाकिस्तान चीन की मदद से पहली बार अंतरिक्ष की यात्रा करने जा रहा है। यह बीजिंग के साथ उसके व्यापक सहयोग का हिस्सा है जिसमें 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' भी शामिल है।
- इस सहयोग के तहत चीन द्वारा पाकिस्तानी उपग्रह लॉन्च किए गए हैं, एक संयुक्त सैटेलाइट-नेविगेशन सिस्टम बनाया गया है और पाकिस्तान में बना एक रोवर भी तैयार किया गया है जिसे 2028 के आसपास चीन के 'चांग-ए 8' (Chang'e 8) चंद्र मिशन पर भेजा जाना है।
- पाकिस्तान की अंतरिक्ष एजेंसी SUPARCO में मानव अंतरिक्ष उड़ान सहयोग की देखरेख करने वाले आमेर गिलानी ने बताया कि पायलट जीशान अली और खुर्रम दाऊद ने बीजिंग में 'चीन अंतरिक्ष यात्री अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र' में इस मिशन के लिए महीनों तक प्रशिक्षण लिया है। इस मिशन की योजना दोनों देशों ने 2019 में बनाई थी।
- चीन ने यह नहीं बताया है कि दोनों में से कौन उड़ान भरेगा या कब, लेकिन गिलानी ने कहा कि अंतरिक्ष यात्री के चयन का अंतिम फैसला अक्टूबर के मध्य या अंत तक होने की उम्मीद है।
चीन में चल रही है पाकिस्तानी पायलट्स की ट्रेनिंग
पाकिस्तान के पायलट्स की अभी चीन में ट्रेनिंग चल रही है। ट्रेनिंग में चीनी भाषा की गहन शिक्षा, अंतरिक्ष यान के सिस्टम को समझना और ऑर्बिट की माइक्रोग्रैविटी और लिफ्ट-ऑफ के दौरान लगने वाले G-फोर्स, दोनों के हिसाब से खुद को ढालना शामिल है। इन दो लोगों ने लगभग 20 फाइनलिस्ट को पीछे छोड़ा जिन्हें शुरू में पाकिस्तानी पायलटों और वैज्ञानिकों के ग्रुप से चुना गया था।
इनकी मेडिकल फिटनेस, मानसिक मजबूती और SUPARCO के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डायरेक्टर उजैर अंसारी के अनुसार G-फोर्स को सहने की क्षमता के आधार पर स्क्रीनिंग की गई थी जो बहुत कम वैज्ञानिकों में होती है। उन्होंने कहा 'आपको ऐसे वैज्ञानिक आसानी से नहीं मिलेंगे जो यात्रा करने और हाई-लेवल G-फोर्स का सामना करने से परिचित हों।' उन्होंने बताया कि इसीलिए तेज रफ्तार से उड़ान भरने का अनुभव रखने वाले इन दो लोगों को चुना गया है।
जानिए चीन पाकिस्तानी एस्ट्रोनॉट को ऑर्बिट में क्यों भेज रहा है?
चीन ऐसा अपनी स्पेस डिप्लोमेसी के तहत कर रहा है। पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्री चीन में बने अंतरिक्ष यान से उड़ान भरेगा जिसे चीन के ही किसी केंद्र से लॉन्च किया जाएगा। उसे चीनी इंस्ट्रक्टर ट्रेनिंग देंगे और ऑर्बिट में वह मंदारिन भाषा में बातचीत करेगा।
पाकिस्तान के पास अपना कोई स्वतंत्र लॉन्च व्हीकल या क्रू वाला अंतरिक्ष यान नहीं है। इस दौरान पाकिस्तानी यात्री करीब एक हफ्ते तक अंतरिक्ष में रहेंगे जो चीनी क्रू सदस्यों के लगभग छह महीने के रोटेशन के मुकाबले बहुत कम समय है। पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्री, मई में स्पेस स्टेशन पहुंचे चीनी क्रू के दो सदस्यों के साथ वापस लौट जाएंगे क्योंकि तीसरे सदस्य के एक साल तक वहां रुकने की उम्मीद है ताकि अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने पर इंसानी शरीर पर पड़ने वाले असर का अध्ययन किया जा सके।
1961 में यूरी गागरिन की पहली उड़ान के बाद से लगभग 50 देशों के नागरिक अंतरिक्ष में उड़ान भर चुके हैं लेकिन सिर्फ तीन देशों रूस, अमेरिका और चीन ने ही अपने क्रू वाले अंतरिक्ष यान लॉन्च किए हैं। चीन का पाकिस्तान को दिया गया यह निमंत्रण पहली बार है जब वह किसी विदेशी अंतरिक्ष यात्री को ले जाएगा।
भारत का 'गगनयान' बनाम पाकिस्तान का स्पेस मिशन
एक तरफ भारत अपने ऐतिहासिक 'गगनयान' मिशन के जरिए पूरी तरह स्वदेशी तकनीक और अपने ही रॉकेट से भारतीय एस्ट्रोनॉट्स को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ आर्थिक और तकनीकी पिछड़ेपन से जूझ रहे पाकिस्तान को ऑर्बिट तक पहुंचने के लिए पूरी तरह से चीन की 'बैसाखी' का सहारा लेना पड़ रहा है।
भारत की स्पेस एजेंसी ISRO जहां आज दुनिया के लिए कमर्शियल सैटेलाइट्स लॉन्च कर रही है वहीं पाकिस्तान की एजेंसी SUPARCO अपने गठन के दशकों बाद भी स्वतंत्र रूप से एक मानव मिशन लॉन्च करने लायक नहीं है। इसीलिए चीन सिर्फ एक हफ्ते के लिए पाकिस्तानी पायलट को अंतरिक्ष स्टेशन पर भेजेगा और एक हफ्ते बाद वापस भेज देगा।
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