नई दिल्ली/इस्लामाबाद: भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के लिए इसके सभी 10 सदस्य देशों को न्योता भेजा है। एससीओ में पाकिस्तान भी शामिल है लिहाजा पाकिस्तान को भी नई दिल्ली की तरफ से न्योता भेजा गया है। नई दिल्ली में 20-22 नवंबर के बीच 'SCO सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम' के पहले संस्करण का आयोजन होना है और इसमें शामिल होने के लिए पाकिस्तानी मंत्री नई दिल्ली के दौरे पर आ सकते हैं। भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 20 अक्टूबर को कहा था कि भारत इस साल के अंत तक पहले 'SCO सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम' की मेजबानी करेगा। उनके इस घोषणा के बाद ही ये न्योता भेजा गया है।- भारत ये न्योता पाकिस्तान के राष्ट्रीय विरासत और संस्कृति मंत्री औरंगजेब खान खीची को भेजा है।
- पाकिस्तान की तरफ से अभी तक औरंगजेब खान की भारत आने की पुष्टि नहीं की गई है।
- अगर औरंगजेब खान आते हैं तो ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार किसी पाकिस्तानी मंत्री की भारत यात्रा होगी।
- इससे पहले साल 2023 में तत्कालीन पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो एससीओ बैठक में शामिल होने गोवा आए थे।
- एससीओ में भारत, रूस, चीन, ईरान, बेलारूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान मिलाकर 10 देश शामिल हैं।
भारतीय मंत्री की यात्रा पर पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने क्या कहा?
पाकिस्तानी मंत्री औरंगजेब खान खीची भारत आएंगे या नहीं इसकी पुष्टि अभी नहीं की गई है। वहीं पाकिस्तान के जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट कमर चीमा ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा 'पाकिस्तान के मंत्री अगर भारत जाते हैं तो किसी को कुछ ज्यादा उम्मीद नहीं करनी चाहिए। कोई बड़ी तब्दीली आने की संभावना नहीं है।' उन्होंने कहा कि 'ये जो समिट भी होने वाला है ये कोई द्विपक्षीय नहीं है और भारत-पाकिस्तान के बीच जिस तरह का विवाद है उसको सुलझाने की कोई शक्ति एससीओ या ब्रिक्स वगैरह की क्षमता नहीं है।'कमर चीमा ने कहा 'औरंगजेब खान पाकिस्तान के कोई बड़े नेता नहीं हैं वो एक सामान्य नेता हैं जो मंत्री बन गये। तो उनके दौरे से ऐसा कुछ ब्रेकथ्रू निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।' कमर चीमा ने कहा 'पाकिस्तान ने अभी तक अपने मंत्री को भेजने पर कोई जवाब नहीं दिया है लेकिन ये एक मल्टीफोरम बातचीत है तो जाना चाहिए।' उन्होंने कहा कि 'भारत ऐसे इवेंट करता रहता है और आगे भी करेगा। लेकिन अगर भारत वाकई गंभीर रहता तो वो SAARC को खत्म नहीं करता।'
पाकिस्तान की दुविधा क्या है?
पाकिस्तान के लिए दुविधा की बात ये है कि वो ना तो अपने मंत्री को भारत भेजने में सहज होगा और नाही उन्हें नहीं भेजने में। अगर पाकिस्तान अपने मंत्री को भेजता है तो शहबाज सरकार के लिए अपने घरेलू दर्शकों को समझाना मुश्किल होगा और अगर शहबाज अपने मंत्री को नहीं भेजते हैं तो इसका संदेश ये जाएगा कि वो मल्टीफोरम प्लेटफॉर्म का सम्मान नहीं कर रहे हैं। आपसी विवाद को उस प्लेटफॉर्म पर ला रहे हैं जिसमें कई देश शामिल हैं।पाकिस्तान की दुविधा क्या है?
पाकिस्तान के लिए दुविधा की बात ये है कि वो ना तो अपने मंत्री को भारत भेजने में सहज होगा और नाही उन्हें नहीं भेजने में। अगर पाकिस्तान अपने मंत्री को भेजता है तो शहबाज सरकार के लिए अपने घरेलू दर्शकों को समझाना मुश्किल होगा और अगर शहबाज अपने मंत्री को नहीं भेजते हैं तो इसका संदेश ये जाएगा कि वो मल्टीफोरम प्लेटफॉर्म का सम्मान नहीं कर रहे हैं। आपसी विवाद को उस प्लेटफॉर्म पर ला रहे हैं जिसमें कई देश शामिल हैं।