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रूस ने स्टील्थ फाइटर के 2 सीटों वाले वेरिएंट को उतारा, भारत खरीदेगा पांचवीं पीढ़ी का जेट?

Updated on 19-05-2026
मॉस्को: रूस के पांचवीं पीढ़ीं के स्टील्थ फाइटर जेट Su-57 का दो सीटों वाला वेरिएंट परीक्षण के दौर में पहुंच गया है। रूस के मिलिट्री एविएशन से जुड़ी जानकारी देने वाले एक टेलीग्राम चैनल FighterBomber ने यह जानकारी दी है। चैनल पर 16 मई को एक पोस्ट में दावा किया गया कि रूस ने Su-57 के दो सीटों वाले वेरिएंट का टैक्सी ट्रायल शुरू कर दिया है। एक दिन बाद चैनल ने दो सीटों वाले वेरिएंट की कथित तस्वीर जारी की। इसके बैकग्राउंड को धुंधला कर दिया गया है, जिससे लोकेशन का पता नहीं चलता है।

भारत को Su-57 देना चाहता है रूस

ध्यान देने वाली बाता है कि रूस अपने इस फाइटर जेट को भारत को बेचना चाहता है और इसके लिए अधिकारियों के बीच संपर्क किया जा रहा है। यूरेशियन टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि रूसी मिलिट्री एविएशन ब्लॉगर ने टेलीग्राम चैनल पर पोस्ट में कहा कि टेस्टिंग के हिस्से के तौर पर Su-57 के दो सीटों वाले मॉडिफिकेशन ने रोलओवर किया। उन्होंने इसके लिए कुछ संभावित नाम भी सुझाए, जैसे इसे Su-57D या Su-57UB या फिर Su-57ED कहा जा सकता है।
तस्वीरों में जो वेरिएंट दिख रहा है, उसका आगे का हिस्सा लंबा है। इसमें एक के पीछे एक दो सीटों वाला कॉकपिट है। यह Su-30 के कॉकपिट से काफी मिलता-जुलता है। कुछ जानकारों ने इसी बात को इन दावों पर शक करने की वजह बताया है। तस्वीर में दिख रहे विमान और एक सीट वाले Su-57 में बाहर से देखने पर कोई बड़ा अंतर नजर नहीं आता।

लॉयल विंगमैन ड्रोन के साथ जुड़ेगा Su-57

एक्सपर्ट को शक है कि इस दो सीटों वाले विमान को मौजूदा T-50-5R एयरफ्रेम में बदलाव करके बनाया गया हो सकता है। यह ध्यान देना जरूरी है कि नया टेल लोगों Su-57 को S-70 ओखोटनिक ड्रोन के साथ दिखाता है। यह शायद इस बात का संकेत है कि एक क्रू वाला फाइटर बनकर लॉयल विंगमैन ड्रोन्स के साथ मिलकर मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग कॉन्फिरगरेशन में काम करेगा।

भारत की हिचकिचाहट होगी खत्म?

रूस एक साल से भी ज्यादा समय से भारत को Su-57 बेचने की कोशिश कर रहा है। बीते साल उसने भारत को एक शानदार डील ऑफर की थी, जिसमें तैयार विमानों की आपूर्ति, भारत में ही Su-57 का उत्पादन और भारत के स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के विकास में मदद शामिल थी। रूस ने डील को और भी आकर्षक बनाते हुए पूरी तरह से लाइसेंस प्राप्त प्रोडक्शन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और संभावित दो-सीटों वाले वेरिएंट की पेशकश की।

दो-सीटों वाले वेरिएंट के पीछे तर्क दिया गया कि ऑपरेशन में ज्यादा लचीलापन देगा। इसमें पायलटों की ट्रेनिंग, जटिल मिशनों का प्रबंधन, लड़ाकू विमान और ड्रोन जैसे लॉयल विंगमैन के बीच टीम वर्क शामिल है। रूसी अधिकारियों ने भारत में बने हथियारों और प्रणालियों को भी विमान में शामिल करने की बात कही थी। हालांकि, भारतीय वायु सेना ने इस डील को स्वीकार करने में हिचकिचाहट दिखाई है, लेकिन जानकारों का कहना है कि दो सीटों वाली पेशकश ज्यादा चलती है।

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