साहिल वाकोडे केस: IIT बॉम्बे पर बरसे मनोज मुंतशिर- पंखा बदलने से क्या होगा? शुतुरमुर्ग की तरह सिर छुपा रहे
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27-09-2026
IIT बॉम्बे में छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे की आत्महत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया है। देश के इस प्रतिष्ठित संस्थान में यह बीते 7 महीने में तीसरा मामला है, जहां एक छात्र ने जिंदगी को चुनने की बजाय मौत को गले लगा लिया। तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं। आरोपों और प्रदर्शनों और पुलिस की जांच के बीच बॉलीवुड के मशहूर गीतकार मनोज मुंतशिर ने इस पर दो टूक राय दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने 5 मिनट 29 सेकेंड का वीडियो शेयर किया और ऐसे सुलगते सवाल पूछे हैं, जिस पर हम सभी को सोचने की जरूरत है। हाल ही 'मैदान' फिल्म के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड जीतने वाले मनोज मुंतशिर ने दो टूक शब्दों में IIT बॉम्बे और ऐसे संस्थानों से कहा है, 'अगर फैन बदलना बड़े समाधान का सिर्फ एक कदम है, तो ठीक है। लेकिन अगर हम मान लें कि यही एकमात्र समाधान है, तो हमसे ज्यादा मूर्ख कोई नहीं।'मनोज मुंतशिर ने वीडियो में कहा है कि इसे सिर्फ IIT बॉम्बे के केस की तरह देखना गलत है। बल्कि वक्त है संभलने का। बच्चों पर पड़ने वाले दबाव को समझने का। वह कहते हैं, 'हॉस्टल रूम से सीलिंग फैन हटा दो और वॉल माउंटेड फैन लगा दो। बच्चे जान देना बंद कर देंगे। कभी-कभी हम समाधान की तलाश में असली समस्या को भूल जाते हैं। हम शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर दबाकर खतरे का सामना कर रहे हैं।मनोज मुंतशिर ने पूछा- क्या पंखा बदल देने से फर्क पड़ेगा?
अमेठी में पैदा हुए 50 साल के मनोज मुंतशिर कहते हैं, 'एक बच्चा आत्महत्या कर लेता है, अपनी जान दे देता है। माता-पिता का बुढ़ापा उजड़ जाता है। बहन की राखियां मिट जाती हैं। पूरे परिवार की हंसी हमेशा के लिए खत्म हो जाती है। और हम क्या करते हैं? पंखा बदल देते हैं। इससे कितना फर्क पड़ेगा? वॉल माउंटेड फैन लगाने से कितना फर्क पड़ेगा? एक-दो प्रतिशत, और वो भी कोई गारंटी नहीं।'
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