भोपाल।
भाजपा ने बीते चुनाव में नौकरशाही से राजनीति में आने वाले गुमानसिंह डामोर को पहले विधानसभा चुनाव में मैदान में उतारा और फिर लोकसभा में भेजा, लेकिन इस बार उनका टिकट काटते हुए प्रदेश सरकार के मंत्री नागरसिंह चौहान की पत्नी और जिला पंचायत अध्यक्ष अनीता चौहान को उम्मीदवार बनाया है। मध्य प्रदेश में तीन माह पूर्व प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने वाली भाजपा लोकसभा चुनाव में मिशन-29 को साधने के लिए भले ही मैदान में उतर गई है, लेकिन मालवा-निमाड़ के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में भाजपा की राह आसान नहीं है।विधानसभा चुनाव में भाजपा की लहर के बावजूद धार, झाबुआ, आलीराजपुर, खरगोन जैसे जिलों में कांग्रेस की वजनदार मौजूदगी ने भाजपा के रणनीतिकारों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कांग्रेस के जिस गढ़ को ढाई दशक के परिश्रम के बाद छीना था, वह उनके हाथों से फिसल कैसे रहा है।मालवा-निमाड़ में तीन माह पहले हुए विधानसभा चुनाव में लहर भी रही बेअसर 66 में से 22 विधानसभा सीटें और आठ में से चार लोकसभा क्षेत्र आदिवासी मतदाता बहुल हैं।
लहर में भी दर्जन भर सीटें नहीं बचा सकी भाजपा
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में मालवा-निमाड़ की 22 आदिवासी मतदाता बहुल सीटों में से कांग्रेस ने 12 सीटें जीती हैं, जबकि 2018 के चुनाव में कांग्रेस के पास इस क्षेत्र से 15 सीटें थीं। 2018 में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला कांटे का रहा था। 2020 में भाजपा की प्रदेश सरकार में वापसी के बाद लाड़ली बहना सहित तमाम योजनाएं लागू कर दी गई। आदिवासी क्षेत्रों पर विशेष फोकस करते हुए भाजपा नेताओं ने न सिर्फ यहां के तूफानी दौरे किए बल्कि क्षेत्र के लिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को मैदान में उतारने में भी कसर नहीं रखी।
भारतीय जनता पार्टी में उम्मीदवार तो कमल ही है। यह लोकसभा चुनाव भी मोदी सरकार की कार्यशैली पर और मोदी की गारंटी पर लड़ा जा रहा है। आदिवासी समाज भी यह जनता है कि मोदी जी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने हर वर्ग के लिए कल्याणकारी योजनाएं प्रस्तुत की हैं। हमें पूरा विश्वास है कि आदिवासी समाज भी जब प्रधानमंत्री और अपना सांसद चुनने निकलेगा तो कमल और मोदी जी को ही चुनेगा।