गरीब पिता ने खेत गिरवी रखकर खरीदा धनुष, कर रहे थे खेतों में काम तभी बेटी ने जीता दूसरा गोल्ड, घर पर न TV, न फोन

Updated on 01-10-2026
नई दिल्ली: एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए 2 गोल्ड मेडल जीतने वाली चिकिता तनिपार्ती पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। चिकिता और अन्य तीरंदाजों की वजह से भारत एशियन गेम्स मेडल टैली में टॉप 10 में जगह बना पाया है। हालांकि, चिकिता की सफलता जितनी सुनहरी है, उनका संघर्ष भी उतना ही मुश्किल था और इस दौरान उनके पिता ने बेटी पर पूरा भरोसा जताया। चिकिता एक गरीब किसान परिवार से आती हैं। उनके पास धनुष खरीदने के पैसे नहीं थे। ऐसे में पिता ने खेत गिरवी रख बेटी को जरूरी सुविधाएं दीं और अब बेटी ने 2 मेडल जीतकर पूरे देश को जश्न मनाने का मौका दिया है।

चिकिता के पिता एक किसान हैं, जिनके पास 3 एकड़ जमीन है। वह वॉलीबॉल खेलते थे, लेकिन पैसों की कमी के चलते कभी भी अपने जिले से बाहर नहीं खेले। हालांकि, वह बेटी को खिलाड़ी बनाना चाहते थे। पहले उन्होंने कराटे के बारे में सोचा, लेकिन वहां राजनीति ज्यादा है। इसके बाद बैडमिंटन के बारे में सोचा, लेकिन हैदराबाद उनके घर से बेहद दूर था और वहां रुकने पर खर्चा ज्यादा था, जो वह नहीं उठा सकते थे। अंत में उन्होंने अपने घर से 20 किमी दूर आर्चरी एकेडमी में 13 साल की बेटी को एडमिशन दिलाया।

धनुष खरीदने में परेशानी

चिकिता के पिता ने पहले बेटी को रिकर्व धनुष दिलाया। इसकी कीमत 5000 रुपये थी, लेकिन कोच ने कंपाउंड धनुष लेने को कहा। पिता ने 30 हजार रुपये में यह भी दिला दिया, लेकिन उन्हें धुनष के बारे में जानकारी नहीं थी और इस बार भी सही धनुष नहीं मिला। ये दोनों धनुष उन्होंने रिश्तेदारों से पैसे लेकर खरीदे थे। अब तीसरा धनुष लेना था और इसकी कीमत 35 लाख रुपये थी। ऐसे में वह साहूकार के पास गए और 2 फीसदी महीने की दर से ब्याज पर अपने खेत गिरवी रखे। इसके बाद सही धनुष खरीदा और अब उनकी बेटी ने इसी धनुष से देश के लिए 2 गोल्ड मेडल जीते हैं।

बेहद कम खर्चीले हैं श्रीनिवास

चिकिता के पिता श्रीनिवास खुद के ऊपर न के बराबर खर्च करते हैं। उन्होंने एक साल से कमीज तक नहीं खरीदी है। अभी भी नोकिया का साधारण हैंडसेट उपयोग करते हैं। घर में कोई टीवी या स्मार्टफोन नहीं है। उनका एक दोस्त चिकिता का मैच देख रहा था। उन्होंने फोन पर श्रीनिवास को बताया कि बेटी ने पहले टीम इवेंट में गोल्ड जीता है फिर मिक्स प्रतियोगिता में भी गोल्ड जीती है। 21 वर्षीय चिकिता तनिपार्थी ने 2026 एशियाई खेलों में भारत के लिए दोहरा स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली खिलाड़ी बनकर इतिहास रच दिया। उन्होंने प्रथिका प्रदीप और ज्योति सुरेखा वेन्नम के साथ महिला मिश्रित टीम स्पर्धा जीती। एक घंटे बाद उन्होंने साहिल जाधव के साथ मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता, जिससे भारत को लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक में मिश्रित टीम स्पर्धा में कोटा भी मिल गया।

बेटी को गोल्ड जीतते नहीं देख पाए

श्रीनिवास अपनी बेटी को इतिहास रचते हुए नहीं देख पाए। उन्होंने कहा कि मैच देखना अच्छा होता, लेकिन उन्हें अपने खेतों में काम करना है। बुवाई भी करनी थी और मोटर भी चलानी थी। इस वजह से वह मैच देखने नहीं गए। स्मार्टफोन खरीदने को लेकर उनका कहना है कि उसमें बहुत खर्चा है। छोटा फोन ठीक है और खेती-बाड़ी में पैसा लगाना ज्यादा बेहतर है। उन्होंने बताया कि धनुष खरीदने के लिए कर्ज लेने के बाद वह भगवान से अच्छी बारिश के लिए रोज प्रार्थना करते थे और बेटी की सफलता के लिए भी प्रार्थना करते थे। अब उनकी मेहनत सफल हुई है। बारिश समय पर हुई। फसल भरपूर हुई और चिकिता ने 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता जीती। वह बेटी को लेकर कलेक्टर के पास गए और मदद मांगी। कलेक्टर ने मदद की और अब पूरे देश का नाम रोशन हुआ है।

दूसरी बार लिया कर्ज

श्रीनिवास जानते थे कि सिर्फ धनुष दिलाने से काम नहीं चलेगा। ऐसे में उन्होंने ट्रेनिंग के लिए पूर्व भारतीय कंपाउंड तीरंदाज अभिषेक वर्मा को फोन किया। उन्होंने पहले तो 2-3 बार टाल दिया, लेकिन बाद में दिल्ली बुलाया। श्रीनिवास ने दूसरी बार कर्ज लिया और बेटी को दिल्ली ले गए। 2021 में अभिषेक ने चिकिता को हरियाणा के सोनीपत में साई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में एडमिशन दिलाया। यहां चिकिता ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और अब गोल्ड जीती हैं।

दूर हुई परेशानी

श्रीनिवास ने जो धनुष 35 लाख का खरीदा था। अब वही धनुष उनकी बेटी को मुफ्त में मिल रहा है। फोन के लिए भी आयोजक पैसे दे रहे हैं। अब चीजें बेहतर हो गई हैं। हालांकि, श्रीनिवास अभी भी टीवी या फोन नहीं लेना चाहते। उनका कहना है कि जब बेटी ओलंपिक में भाग लेगी तब वीडियो वाला फोन लेंगे। इस फोन में बेटी को देखना अच्छा होगा।

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