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ट्रंप ने G2 पर क‍िया बड़ा ऐलान, दुनिया को मिलकर चलाएंगे अमेरिका और चीन, भारत का क्या होगा?

Updated on 15-05-2026
बीजिंग: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को चीन के राष्ट्रपति के साथ हुई शिखर वार्ता को बहुत ऐतिहासिक कहा है। इसके साथ ही उन्होंने G2 को लेकर बड़ी बात कही है। अमेरिकी ब्रॉडकास्टर फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने अमेरिका और चीन को G2 (ग्रुप ऑफ टू) कहकर संबोधित किया और कहा कि ये दो महान देश हैं। मुझे लगता है कि इतिहास में इसे एक बहुत ही महत्वपूर्ण पल के तौर पर याद किया जाएगा। गुरुवार के शिखर सम्मेलन ने एक बात साफ कर दी है कि चीन अब खुद को अमेरिका के साथ एक G2 ताकत के रूप में देखता है।

गुरुवार को हुए शिखर सम्मेलन के दौरान जो बात सबसे महत्वपूर्ण थी, वह दोनों नेताओं को रचनात्मक रणनीतिक स्थिरता पर आधारित संबंध बनाने पर सहमति थी। यह एक ऐसा विचार था, जिसने एक नए जी-2 युग के आगमन का संकेत दिया। यह एक ऐसी संभावित व्यवस्था होगी जिसमें चीन और अमेरिका वैश्विक वर्चस्व साझा करेंगे।

जिनपिंग ने क्यों किया प्राचीन यूनानी सिद्धांत का जिक्र?

गुरुवार को शिखर बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने ट्रंप से एक दिलचस्प सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि क्या चीन और अमेरिका थ्यूसीडाइड्स ट्रैप से उबरकर बड़े देशों का आपसी संबंधों का एक नया प्रतिमान स्थापित कर सकते हैं? थ्यूसीडाइड्स ट्रैप प्राचीन यूनानी सिद्धांत है, जिसके अनुसार उभरती हुई शक्तियां और पहले स्थापित वर्चस्व वाल देश आपस में अविश्वास और डर के चलते अक्सर युद्ध की ओर बढ़ जाते हैं।

चीन रवाना होने से पहले भी डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसी टिप्पणियां की, जो जी-2 की ही आवाज प्रतीत होती हैं। उन्होंने कहा,"हम दो महाशक्तियां हैं। सैन्य शक्ति के मामले में हम पृथ्वी पर सबसे शक्तिशाली राष्ट्र हैं। चीन को दूसरे स्थान पर माना जाता है।"

अमेरिका-चीन का वर्चस्व भारत के लिए खतरा

भारत, ब्राजील और BRICS देशों के समूह में शामिल अन्य प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं अमेरिका और चीन के बढ़ते संबंधों को अपने वैश्विक ताकत बनने के लिए चुनौती के तौर पर देखती हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि अमेरिका में चीनी निवेश से जुड़ा कोई भी समझौता ग्लोबल साउथ के देशों से पूंजी और तकनीक को अमेरिका की ओर मोड़ देगा। इन देशों में चीन ने हाल के वर्षों में भारी निवेश किया है।

अमेरिका-चीन की जुगलबंदी पर दुनिया की नजर

एक्सपर्ट का कहना है कि G2 बनने का मतलब होगा कि बाकी दुनिया पर अमेरिका-चीन का वर्चस्व हो जाएगा। लंदन स्थित SOAS चाइना इंस्टीट्यूट के त्सांग ने कहा कि अगर G2 सच में बन जाता है तो दुनिया पर दो ऐसी स्वार्थी ताकतों का राज होगा जिन्हें सिर्फ अपनी परवाह होगी।G2 की संभावना ने यूरोप में अमेरिकी सहयोगियों को भी डर की चपेट में ले लिया है। उन्हें आशंका है कि अमेरिका और चीन उन्हें अहम फैसलों से बाहर कर सकते हैं और ऐसे सौदे कर सकते हैं, जो उनके हितों के खिलाफ हों। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूरोप, भारत, जापान, ब्राजील, मध्य पूर्व और आसियान देशों की व्यवस्थाएं नहीं चाहतीं कि वैश्विक व्यवस्था के बारे में फैसले उनके सिर के ऊपर से लिए जाएं।

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