सऊदी अरब के खिलाफ हूतियों की गुप्त मदद कर रहा UAE! खाड़ी देशों की अंदरूनी दुश्मनी आई सामने

Updated on 28-10-2026
अबू धाबी/रियाद: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर यमन के अंसारल्लाह यानि हूती विद्रोहियों की मदद करने के गंभीर आरोप लगाए गये हैं। 'ड्रॉप साइट' ने मामले की जानकारी रखने वाले चार अधिकारियों के हवाले से ये दावा किया है। इन अधिकारियों ने दावा किया है कि सऊदी अरब पर हमला करने के दौरान यूएई ने हूती विद्रोहियों को टारगेटिंग यानि लक्ष्य तय करने में मदद की है। इन सूत्रों ने बताया है कि यूएई से जुड़े यमनी गुटों ने हूतियों की मदद की है और यूएई के इससे कोई आपत्ति नहीं है।

'ड्रॉप साइट' ने ये भी दावा किया है कि ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को सऊदी अरब पर हमला करने के लिए यूएई ने सीधे तौर पर खुफिया जानकारियां भी मुहैया करवाई हैं। ये आरोप काफी गंभीर हैं और जटिल मिडिल ईस्ट की स्थिति को उजागर करते हैं। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच पिछले कुछ महीनों से तनाव काफी बढ़ा हुआ है खासकर सऊदी अरब ने यूएई को यमन से निकलने पर मजबूर कर दिया था।

संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी में विवाद क्या है?

  • यमन के अंदर UAE दक्षिणी ट्रांजिशनल काउंसिल यानि STC को समर्थन करता है। ये एक अलगाववादी समूह है। जबकि सऊदी अरब यमन की सरकार का समर्थन करता है।
  • यूएई चाहता है कि वो यमन के बंदरगाहों जैसे मुकल्ला बंदरगाह जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में अपना प्रभाव मजबूत रखे ताकि समुद्री सप्लाई चेन पर उसका दबदबा बना रहे लेकिन सऊदी अरब इसे अपनी दक्षिणी सीमा और लाल सागर में अपनी सप्लाई चेन के लिए खतरा मानता है।
  • पिछले साल दिसंबर महीने में सऊदी अरब ने मुकल्ला बंदरगाह पर भयानक हमले किए थे। ये हमले STC को भेजे जाने वाले हथियारों के खेप पर किए गये थे। इसके बाद सऊदी और यूएई के बीच का तनाव खुलकर सामने आ गया।
वहीं 'ड्रॉप साइट' यमन के एक सूत्र के हवाले से बताया है कि संयुक्त अरब अमीरात ने राजधानी सना में अंसारल्लाह समूह को काफी महत्वपूर्ण खुफिया जानकारियां दी हैं। इसके अलावा यूएई और हूतियों के बीच बातचीत का रास्ता अभी भी खुला हुआ है। यमन के उस सूत्र के हवाले से रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अंसारल्लाह ने सैन्य कमांडरों के साथ अंदरूनी संपर्क बनाए रखा है जो यूएई को लेकर वफादार हैं।

संयुक्त अरब अमीरात और हूती विद्रोहियों के बीच 'वैचारिक दुश्मनी'

हूती विद्रोहियों की मदद संयुक्त अरब अमीरात कर रहा है ये काफी हैरान करने वाला खुलासा है क्योंकि ये दोनों ही वैचारिक तौर पर एक दूसरे के दुश्मन हैं जबकि सऊदी और संयुक्त अरब अमीरात के बीच वर्षों की दोस्ती रही है। लेकिन मिडिल ईस्ट की राजनीति इसीलिए जटिल है और यहां जो घटता है वो हमेशा चौंकाता है।

हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन हासिल है जिसने युद्ध के दौरान सबसे ज्यादा हमले संयुक्त अरब अमीरात पर ही किए थे। यमन के अंदर भी यूएई के समर्थन वाला STC हूतियों के खिलाफ ही लड़ता है। लेकिन चूंकी हूती विद्रोही इस वक्त सऊदी अरब पर हमला कर रहे हैं तो 'दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है' वाली थ्योरी के तहत संयुक्त अरब अमीरात ने हूतियों को मदद देनी शुरू कर दी है।

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