चीन के सामने बिना बिजली 4 दिनों तक भटकता रहा अमेरिकी युद्धपोत, दाने-दाने को मोहताज हुए नौसैनिक

Updated on 05-09-2026
वॉशिंगटन: अमेरिका की गिनती दुनिया की महाशक्तियों में होती है। इसका कारण सिर्फ अमेरिकी अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि उसकी सैन्य ताकत भी है। लेकिन, क्या हो जब कोई कहे कि अमेरिका की सैन्य शक्ति पर अब बट्टा लग चुका है। हाल में ही पूरी दुनिया ने अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन की तस्वीरें देखी हैं, जिसमें वह किसी कबाड़ से ज्यादा नजर नहीं आ रहा। लेकिन, अब खुलासा हुआ है कि जुलाई में अमेरिकी नौसेना का एक गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर दक्षिण चीन सागर में बिना बिजली के चार दिनों तक भटकता रहा था। यह वही इलाका है, जिसके चप्पे-चप्पे पर चीन की नजर रहती है।


वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक रैंड कॉर्पोरेशन में वरिष्ठ नीति शोधकर्ता और अमेरिकी नौसेना के पूर्व कप्तान ब्रैड मार्टिन ने कहा कि दक्षिण चीन सागर में बिजली के बिना भटकता हुआ अमेरिकी गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर इस बात का संकेत है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का अभियान लंबा खिंचने के कारण वह अपनी रिजर्व क्षमता पर दबाव डाल रहा है। उन्होंने यह भी कहा, "यह एक बेहद असामान्य घटना है और इसके पीछे कई तरह के उपकरण और प्रक्रिया संबंधी विफलताएं हुई होंगी। इस तरह की विफलताएं मेंटीनेंस में देरी और ट्रेनिंग की कमियों जैसे मुद्दों का एक अनुमानित परिणाम हैं।"

चीन के सामने 'अंधा' हुआ अमेरिकी युद्धपोत

अमेरिकी नौसेना ने बताया था कि उसका गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर यूएसएस बेनफोल्ड में जनरेटर से संबंधित एक इंजीनियरिंग खराबी के कारण 24 जुलाई को बिजली चली गई। इसके चलते लगभग 10,000 टन वजनी आर्ले बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर दक्षिण चीन सागर में चार दिनों तक बिजली के बिना फंसा रहा। अमेरिकी सातवें बेड़े के प्रवक्ता कमांडर मैथ्यू कॉमर ने बयान में कहा कि यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नियमित अभियान चलाते समय विध्वंसक पोत की बिजली चली गई।


भोजन-पानी, AC के बिना तड़पते रहे अमेरिकी नौसैनिक

रिपोर्ट में कोमर के हवाले से कहा गया है कि इस कारण जहाज पर सवार नाविकों को पीने का पानी और भोजन की कमी से जूझना पड़ा। इतना ही नहीं, शौचालयों ने काम करना बंद कर दिया और बिना एयर कंडिशनिंग के पूरा जहाज एक गर्म भट्टी बन गया था। नाविकों की सूचना पर कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के एक अन्य विध्वंसक पोत यूएसएस रॉबर्ट स्मॉल्स चार दिनों बाद मदद के लिए पहुंचा। उसने यूएसएस बेनफोल्ड को फिलीपींस के सुबिक खाड़ी में ले जाने से पहले उसके चालक दल को भरपेट भोजन कराया।

30 जुलाई को बहाल हुई यूएसएस बेनफोल्ड में बिजली

कोमर के हवाले से कहा गया है कि 30 जुलाई को यूएसएस बेनफोल्ड में बिजली बहाल कर दी गई थी। इसके बाद बेनफोल्ड जापान के लिए रवाना हो गया, जबकि स्ट्राइक ग्रुप के बाकी जहाज ईरान के साथ युद्ध में यूएसएस अब्राहम लिंकन की जगह लेने के लिए मध्य पूर्व की ओर बढ़ गए। बताया जा रहा है कि इस दौरान चीनी नौसेना ने बिना बिजली के भटक रहे यूएसएस बेनफोल्ड पर 24 घंटे नजर बनाए रखी। हालांकि, चीन की तरफ से अमेरिकी युद्धपोत को किसी तरह की मदद उपलब्ध नहीं कराई गई।

अमेरिकी नौसेना की क्षमता पर सवाल

अमेरिकी नौसेना के विशेषज्ञ ब्रैड मार्टिन ने कहा कि ईरान संघर्ष अमेरिकी सेना पर भारी पड़ रहा है। उन्होंने कहा, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि एक मोर्चे पर लंबे समय तक चलने वाले अभियान का असर दूसरे मोर्चों पर प्रतिक्रिया देने की क्षमता पर पड़ सकता है।मुझे नहीं लगता कि संभावित विरोधियों को इसे 'जवाब देने में असमर्थ' होने के संकेत के रूप में लेना चाहिए, लेकिन स्पष्ट रूप से अमेरिका आरक्षित क्षमता का उपयोग कर रहा है और उस पर दबाव डाल रहा है।"

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