विपक्ष ने विधानसभा में उठाया इंदौर में दूषित जल से हुई मौतों पर सवाल किए

Updated on 19-02-2026

     विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने विधानसभा में उठाया इंदौर के  भागीरथपुरा में  दूषित पानी से हुई मौतों पर सरकार से सवाल किए। 

सवाल कुछ इस प्रकार है 

 उप मुख्‍यमंत्री, लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि 1.क्या विभाग को इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में जलजनित बीमारी के प्रकोप की जानकारी थी? यदि हाँ, तो विभाग को इस घटना की पहली सूचना किस तिथि को और किस माध्यम से प्राप्त हुई?
 2. दिनांक 21 दिसम्बर, 2025 से प्रश्‍न दिनांक तक उक्त प्रकोप में कुल कितनी मृत्यु हुई है? कुल कितने व्यक्ति अस्पताल में भर्ती किये गये तथा वर्तमान में कितने मरीज अब भी उपचाराधीन है?
 3. क्या उक्त अवधि में हो रही मौतों एवं बीमारियों के कारणों का पता लगाने के लिए प्रयोगशाला जांच करायी गई थी?
 यदि हाँ, तो जांच में कौन-कौन से जलजनित रोगों जैसे हैजा, कॉलेरा, टाइफॉयड एवं डायरिया आदि की पुष्टि या अस्वीकृति हुई? 4. क्या विभाग द्वारा इस प्रकरण के संबंध में इंदौर नगर निगम से घटना के कारणों, परिस्थितियों एवं क्रम पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी? यदि हाँ, तो रिपोर्ट कब मांगी गई एवं कब प्राप्त हुई तथा उसके मुख्य निष्कर्ष क्या है?

 सरकार की तरफ से 
उप मुख्‍यमंत्री, लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा ( श्री राजेन्द्र शुक्ल )  स्वास्थ्य विभाग ने जवाब दिया 

 इंदौर को भागीरथपुरा क्षेत्र में हुई जलजनित बीमारी के आउटब्रेक की जानकारी दिनांक 29.12.2025 को U.P.H.C. भागीरथपुरा के चिकित्सा अधिकारी के माध्यम से आई.डी.एस.पी. शाखा को प्राप्त हुई। 

 उक्त एक्‍यूट डायरियल डिजीज के कारण कुल 20 मृत्यु की अधिकारिक पुष्टि हुई है एवं कुल 459 व्यक्ति अस्पताल में भर्ती किये गये तथा वर्तमान में उत्तर दिनांक तक 04 मरीज उपचाराधीन हैं।
 
सरकार ने बताया उक्त अवधि में हो रही बीमारियों एवं मृत्यु के संभावित कारणों की पुष्टि हेतु NIRBI-Kolkata, MGM Microbiology Lab & DPHL- Indore प्रयोगशाला इंदौर द्वारा जल नमूनों एवं रोगियों के Stool नमूनों की प्रयोगशाला में जाँच कराई गई थी। प्रयोगशाला से प्राप्त जाँच निष्कर्षों के अनुसार कॉलेरा एवं E.coli की रिपोर्ट प्राप्त हुई है।

 सरकार ने बताया अभी माननीय म.प्र. उच्‍च न्‍यायालय खंडपीठ, इंदौर द्वारा जनहित याचिका में पारित आदेश अनुसार सेवानिवृत्‍त उच्‍च न्‍यायालय के न्‍यायाधीश द्वारा प्रकरण की जांच की जाना है। अत: तत्‍संबंध में कोई जानकारी नगर निगम से अपेक्षित नहीं है।

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