A PHP Error was encountered

Severity: Notice

Message: Undefined variable: description

Filename: views/header.php

Line Number: 9

" />
"> मध्यप्रदेश
"> देश
"> विदेश

व्लादिमीर पुतिन का 'मौत को मात' देने वाला 26 अरब डॉलर का प्लान, बेटी को सौंपी जिम्मेदारी, मिलेगी 150 साल की जिंदगी?

Updated on 30-05-2026
मॉस्को: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बायो मेडिकल रिसर्च के जरिए ऐसे कार्यक्रम को तरजीह दे रहे हैं, जिसका मकसद इंसान की जिंदगी बढ़ाना है। यह कार्यक्रम 26 अरब डॉलर की सरकारी सहायता से चल रहा है। इसमें जेनोट्रांसप्लांटेशन जैसी अत्याधुनिक तकनीक और सूअरों के अंदर प्रत्यारोपण योग्य मानव अंगों को विकसित करने के प्रयास शामिल हैं। इस कार्यक्रम का मकसद दीर्घायु की खोज करना है। रूसी वैज्ञानिक इंसान की जिंदगी 150 साल तक करने की कोशिश में हैं।

रूस समर्थित वैज्ञानिक पहल में जीन थेरेपी, अंग मुद्रण, मिनी-पिग अंग संवर्धन (ऑर्गन कल्टीवेशन) और बहुत कम तापमान क्रायोथेरेपी शामिल है। ये सभी नई स्वास्थ्य संरक्षण तकनीक 26 अरब डॉलर की विशाल सरकारी पहल के अंतर्गत हैं। इस कार्यक्रम ने उन अटकलों को हवा दी है, जो दावा करते हैं कि पुतिन लंबा जीवन जीने के प्रति जुनूनी हैं।

क्या है रूसी वैज्ञानिकों का प्लान

रूसी सरकार ने हाल ही में घोषणा की थी कि वैज्ञानिक दीर्घायु पहल के तहत कोशिकाओं की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने के लिए जीन-थेरेपी उपचार विकसित कर रहे हैं। 23 अप्रैल को रूसी उप विज्ञान मंत्री डेनिस सेकिरिंस्की ने कहा था कि यह दवा उम्र बढ़ने के खिलाफ लड़ाई में सबसे आशाजनक रास्तों में से एक है।

रूसी शोधकर्ता अब बायोप्रिंटिंग यानी जिंदा टिश्यू की 3डी प्रिंटिंग के साथ जेनोट्रांसप्लांटेशन पर काम कर रहे हैं, जो आनुवंशिक रूप से संशोधित मिनी-पिग के अंदर मानव अंगों को विकसित करने की प्रक्रिया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि मानव उपास्थि ऊतक और चूहे की थायरॉइड ग्रंथि को बायोप्रिंट कर लिया है। उनका लक्ष्य 2030 तक पूरी तरह से इंसान का ऑर्गन ट्रांसप्लांट करना है।

कैसे मिलेगा लंबा जीवन

साल 2024 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम का मकसद जीन थेरेपी और रीजेनरेटिव मेडिसिन को आगे बढ़ाना है। रिपोर्ट में बताए गए अंदरूनी अनुमानों के मुताबिक, यह कार्यक्रम आखिरकार 175,000 तक लोगों की जान बचाने में मददगार साबित हो सकता है। हालांकि इस आंकड़े की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।

शुरुआती रिसर्च में मिली अहम कामयाबियों में बायोप्रिंटेड इंसानी कार्टिलेज टिश्यू और एक काम करने वाली चूहे की थायरॉइड ग्रंथि बनाना शामिल है। रिसर्चर्स का इस दशक के आखिर तक इंसानों में पूरे अंग को बदलने की क्षमता हासिल करना है। इसकी देखरेख पुतिन की बेटी एंडोक्रिनोलॉजिस्ट मारिया वोरोन्त्सोवा और फिजिसिस्ट मिखाइल कोवलचुक कर रहे हैं।

पुतिन की बेटी कर रही खोज

क्रेमलिन प्रेस सेवा ने कहा है कि कई वैज्ञानिक इन कार्यक्रमों पर काम कर रहे हैं। ये परियोजनाएं सरकार समर्थित हैं। इस पहल के केंद्र में पुतिन के करीबी लोगों में से दो प्रभावशाली व्यक्ति हैं। एक पुतिन की बेटी मारिया वोरोन्त्सोवा हैं और दूसरे भौतिक विज्ञानी मिखाइल कोवलचुक हैं, जो सोवियत-युग के कुर्चातोव संस्थान के प्रमुख हैं।
कोवलचुक क्रेमलिन के वृद्धावस्था विरोधी अभियान के प्रमुख विचारकों में से एक बन गए हैं। उनका कहना है कि विज्ञान जल्द ही मनुष्यों को शरीर के अंगों की लगातार मरम्मत और प्रतिस्थापन करने में सक्षम बनाएगा। कोवलचुक ने कहा है कि अमरता पर चर्चा करना कठिन है लेकिन मनुष्य की मरम्मत करने की क्षमता निस्संदेह बढ़ेगी।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें