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पानी बुझाएगा भारत की तेल की प्यास, यूरोपीय कंपनी का दावा कम होगी ईंधन की खपत

Updated on 18-05-2026
नई दिल्ली: बढ़ती ऊर्जा आयात लागत, कमजोर होते रुपये और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से जूझ रहे भारत के सामने यूरोपीय देश मोनाको की एक कंपनी ने अनोखा समाधान पेश किया है। कंपनी का दावा है कि इस संकट का हल 'पानी' में छिपा हो सकता है।

मोनाको स्थित कंपनी FOWE इको सॉल्यूशंस ( FOWE Eco Solutions ) ने अपनी पेटेंटेड कैविटेक फ्यूल इमल्शन टेक्नोलॉजी (Cavitech fuel emulsion technology) को लेकर बड़ा दावा किया है। कंपनी का कहना है कि बिना किसी इंजन बदलाव या प्लांट को बंद किए, इसके जरिए उद्योग ईंधन की खपत को 10 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं और हानिकारक उत्सर्जन में भी भारी कटौती ला सकते हैं।

भारत के लिए महत्वपूर्ण

यह प्रस्ताव भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण समय पर आया है, जो अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88% हिस्सा आयात करता है। वैश्विक तेल बाजार में चल रही उथल-पुथल के कारण सरकारी तेल कंपनियों को उपभोक्ताओं को मूल्य वृद्धि से बचाने के लिए भारी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी राष्ट्रीय आर्थिक प्राथमिकता के रूप में ईंधन संरक्षण पर लगातार जोर देते रहे हैं।

कैसे काम करती है यह तकनीक?

  • FOWE के COO हेमंत सोंधी के मुताबिक इस सिस्टम के केंद्र में कंट्रोल कैविटेशन टेक्नोलॉजी (CCT) है, जिसकी मदद से फ्यूल-ऑयल-वाटर (ईंधन-तेल-पानी) का एक मिश्रण (इमल्शन) तैयार किया जाता है।
  • इस प्रक्रिया में बिना किसी रासायनिक एडिटिव्स के ईंधन तेल के अंदर पानी की बेहद सूक्ष्म बूंदों को मिलाया जाता है।
  • जब इस मिश्रित ईंधन को जलाया जाता है, तो पानी की ये सूक्ष्म बूंदें दहन कक्ष (Combustion Chambers) के अंदर माइक्रो-विस्फोट पैदा करती हैं।
  • इससे ईंधन बेहद महीन कणों में टूट जाता है और पूरी तरह से जलता है। इससे दहन दक्षता बढ़ती है और ईंधन की खपत कम होती है।

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