जाने-माने शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 20 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। इस दौरान उनका 9 किलो से ज्यादा वजन घट चुका है। वो बस नमक-पानी पीकर ही वो जीवित हैं। उनके डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय से भूख हड़ताल के कारण वह गंभीर स्थिति में पहुंच गए हैं और इससे उनके अंगों पर असर पड़ना शुरू हो सकता है। सोनम वांगचुक के तेजी से बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।देशभर की 1800 से ज्यादा दिग्गज हस्तियों ने वांगचुक को सपोर्ट किया है, साथ ही उनसे भूख हड़ताल समाप्त करने की भी अपील की है। लगातार राजनीतिक दिग्गज, फिल्मी हस्तियां और अलग-अलग वर्ग के लोग वांगचुक को सपोर्ट करने जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि देश की राजधानी के 'दिल' में चल रहे इस आंदोलन की वजह क्या है? सोनम वांगचुक 20 दिनों से भूख हड़ताल पर क्यों हैं? जान लीजिए एक-एक बात।सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर क्यों हैं?
59 वर्षीय सोनम वांगचुक ने ये आंदोलन शिक्षा में सुधार की मांग को लेकर शुरू किया। पूरा मामला तब सामने आया जब इसी साल राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET 2026) में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक केस हुआ। इसी के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू किया। CJP ने फाउंडर अभिजीत दीपके नेतृत्व में छह जून को राष्ट्रीय राजधानी में अपना पहला प्रदर्शन शुरू किया, जो बाद में 20 जून को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने में बदल गया। सोनम वांगचुक इसी प्रदर्शन में 28 जून को शामिल हुए और तब से ही वह अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।सोनम वांगचुक बस नमक-पानी पर हैं 20 दिन से
सोनम वांगचुक बीते 20 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। राजनीतिक दलों के नेताओं और समर्थकों की अपील के बावजूद अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म करने से इनकार कर दिया है। वांगचुक ने कहा है कि सरकार से कोई प्रतिक्रिया मिले बिना भूख हड़ताल तोड़ने से गलत संदेश जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर मैं कुछ खा लूं, तो क्या संदेश जाएगा? सरकार को यही संदेश जाएगा कि जवाबदेही की कोई जरूरत नहीं है। प्रदर्शनकारी आते हैं और चले जाते हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि अगर वह भूख हड़ताल खत्म कर दें तो क्या बदल जाएगा।भूख हड़ताल खत्म करने पर सोनम वांगचुक ने तोड़ी चुप्पी
सोनम वांगचुक ने लोगों से 20 जुलाई को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रस्तावित संसद मार्च को मजबूत बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों को राजनीति विज्ञान और लोकतंत्र का असल सबक सीखने के लिए इसमें शामिल होना चाहिए। अपनी भूख हड़ताल के दौरान वो लगातार वीडियो संदेश जारी करते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मुझे हजारों संदेश मिले हैं जिनमें मुझसे भूख हड़ताल तोड़ने के लिए कहा गया है। कई वरिष्ठ नेता मुझसे मिलने आए हैं और उन्होंने बड़े स्नेह और चिंता के साथ मुझसे बात की है। कुछ लोगों ने तो अदालत का रुख किया और अदालत से मुझे खाना खिलाने का निर्देश देने का अनुरोध किया।'दो-चार दिन में मैं मर जाऊं, मेरी ऐसी हालत नहीं'
अपनी सेहत को लेकर लोगों की चिंता दूर करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि अब तक हुई मेडिकल जांच में तुरंत किसी भी तरह के खतरे का संकेत नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि मेरी हालत ऐसी नहीं है कि मैं दो-चार दिन में मर जाऊंगा। कई डॉक्टरी जांच की गई हैं और 20 दिन की भूख हड़ताल के हिसाब से नतीजे काफी सामान्य हैं। ईसीजी भी किया गया और वह भी ठीक है। मैं अभी कई और दिनों तक इसे जारी रख सकता हूं। इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने मानसून सत्र के पहले दिन 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान किया है।