नई दिल्ली: कच्चे तेल की कीमत में हाल में काफी तेजी आई है। इससे एटीएफ यानी विमान ईंधन की कीमत भी बहुत बढ़ गई है। इससे एयरलाइन कंपनियों की मुश्किल बढ़ गई है। एयर इंडिया रोजाना करीब 100 उड़ानें कम करने की तैयारी में है। इनमें डोमेस्टिक और इंटरनेशनल रूट्स शामिल हैं। एयर इंडिया रोजाना करीब 1,100 फ्लाइट्स ऑपरेट करती है। कंपनी जून में यूरोप, नॉर्थ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर के लिए फ्लाइट्स में सबसे ज्यादा कटौती करेगी।सोमवार को फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने सरकार से मदद की गुहार लगाई थी। इस फेडरेशन में इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट शामिल हैं। फेडरेशन का कहना था कि विमान ईंधन यानी एटीएफ की मौजूदा कीमतें इंडस्ट्री पर बहुत ज्यादा दबाव डाल रही हैं। सरकार को लिखे पत्र में एफआईए ने कहा कि इस दबाव के कारण एयरलाइन इंडस्ट्री अब बंद होने की कगार पर पहुंच गई है।जेट फ्यूल की कीमत
सरकार ने डोमेस्टिक जेट फ्यूल में राहत दी है लेकिन अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर कोई राहत नहीं दी गई है। दिल्ली में जेट फ्यूल की कीमतें मार्च की तुलना में दोगुनी हो चुकी हैं। हालांकि आज सरकार ने जेट फ्यूल की कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं की। ग्लोबल एवरेज जेट फ्यूल की कीमत 24 अप्रैल को खत्म सप्ताह में 179.46 डॉलर प्रति बैरल थी जो फरवरी की तुलना में 80 फीसदी ज्यादा है। फरवरी के अंतिम दिनों में इसकी कीमत 99.40 डॉलर थी।एयरलाइन कंपनियों की ऑपरेटिंग कॉस्ट में जेट फ्यूल की हिस्सेदारी 40 फीसदी तक होती है। इसमें मामूली तेजी भी एयरलाइन कंपनियों के मुनाफे को प्रभावित कर सकती है और इससे एयर टिकट की कीमत बढ़ सकती है। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक एयर इंडिया के एक अधिकारी ने कहा कि अधिकांश फ्लाइट्स पर कंपनी ऑपरेटिंग कॉस्ट भी नहीं निकाल पा रही है। अगर एटीएफ में तेजी जारी रही तो हमें फ्लाइट्स में और कटौती करनी पड़ेगी। एयर इंडिया का घाटा
एटीएफ की कीमत बढ़ने से एयर इंडिया पर इंडिगो से ज्यादा असर हो रहा है। इसकी वजह यह है कि टाटा ग्रुप की इस कंपनी का इंटरनेशनल ऑपरेशन ज्यादा है। पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने से एयर इंडिया की यूरोप और नॉर्थ अमेरिका जाने वाली फ्लाइट्स को लंबा रूट लेना पड़ रहा है। इससे तेल की खपत और क्रू कॉस्ट बढ़ गया है। नॉर्थ अमेरिका जाने वाली फ्लाइट्स को वियना या स्टॉकहोम में रुकना पड़ रहा है। इससे एयरलाइन का खर्च बढ़ गया है।
एयर इंडिया का घाटा पहले ही 20,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। टाटा संस और उसकी स्ट्रैटजिक पार्टनर सिंगापुर एयरलाइन्स पर इस घाटे को कम करने और एयर इंडिया को मुनाफे में लाने का भारी दबाव है। हाल में कंपनी के विदेशी सीईओ कैंपबेल विल्सन ने कार्यकाल समाप्त होने से एक साल पहले ही इस्तीफा दे दिया था। हालांकि उत्तराधिकारी की नियुक्ति होने तक वह अपने पद पर बने रहेंगे। एयर इंडिया को टाटा ग्रुप ने 2022 में खरीदा था।